सड़कों पर हाथों में गुब्बारे लिए बच्चे हों या फिर भीख मांगते, उनके बचपन की डोर संगठित गिरोहों के हाथों में है। गोपनीय सूचना आने के बाद राज्य बाल आयोग ने भी इसे माना और इस पर पुलिस की मदद से कार्रवाई का आदेश दिया गया। प्रशासन और पुलिस के सहयोग से अभियान चला तो हकीकत भी सामने आने लगी है। गोरखपुर जोन में 15 दिन के अभियान में 136 बच्चों को मुक्त कराया गया है। हालांकि पुलिस अभी उस गिरोह तक नहीं पहुंच सकी है, जो इसे नियंत्रित कर रहे हैं।
बच्चों को उनके अभिभावक या फिर बाल कल्याण, नारी निकेतन को सुपुर्द कर दिया गया है। जांच पड़ताल जारी है और अफसरों का दावा है कि इसके पीछे जो भी होंगे उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल गोरखपुर के एडीजी की ओर से चलाए गए अभियान की जानकारी जनवरी में डीजीपी को भेजी गई है।
जानकारी के मुताबिक भीख मांगना अवैधानिक है। वहीं अगर बच्चे के हाथ में कोई बेचने वाला सामान है, तो यह गैरकानूनी नहीं रह जाता है। इसी कानून का गिरोहबंद लोग इस्तेमाल कर रहे हैं। इस कानून का गलत फायदा उठाकर बच्चों के हाथों में गुब्बारे पकड़ाए जाते हैं और वह बेचने की आड़ में भीख मंगवाने लगते हैं। उनकी बेबसी पर हर किसी को तरस भी आ जाता है और कोई गुब्बारा खरीद कर ज्यादा रुपये दे देता है या फिर कुछ लोग ऐसे ही रुपये थमा देते हैं, लेकिन इससे उनका बचपन खराब हो रहा है। इस पर शायद ही कोई ध्यान देता है।