बरहजिया पैसेंजर ट्रेन अपनी यात्रा के दौरान भटनी, पिवकोल, सलेमपुर, देवराहा बाबा, सतरांव, सिसई गुलाब राय और बरहज से गुजरती है। इन स्टेशनों के लिए किराया मात्र 10 रुपये है। रेलवे के आंकड़ों के अनुसार इस ट्रेन के लिए प्रतिदिन औसतन 350 से 400 टिकट बिकते हैं।
रेलवे ने की थी रूट को बंद करने की कोशिश
इस रेल रूट पर हो रहे घाटे को देखते हुए वर्ष 2013 में रेलवे ने इसे बंद करने की कोशिश की थी। लेकिन इसकी भनक लगते ही बड़ा आंदोलन खड़ा हो गया। बरहज में इसके खिलाफ व्यापारी सड़क पर उतर गए। लोगों के आक्रोश को देखते हुए रेलवे ने तब अपना फैसला वापस ले लिया था।
ब्रिटिश काल में था बरहज का औद्योगिक महत्व
ब्रिटिश काल में बरहज की एक औद्योगिक पहचान हुआ करती थी। यही कारण था कि अंग्रेजों ने पहले इस स्थान को जलमार्ग से फिर रेल मार्ग से जोड़ा। यहां पर बड़ी संख्या में खांड़सारी और दाल मिलें थीं। यहां से शीरा चट्टा का कारोबार हुआ करता था। बाद में बरहज को लोहे के सामानों के लिए भी जाना जाने लगा।