पूर्वोत्तर रेलवे में 64 साल पहले पहली डीजल रेल कार दौड़ी थी। जिसका उद्घाटन यूपी के तत्कालीन वित्त मंत्री हाफिज मोहम्मद इब्राहिम ने किया था। 1 अगस्त 1957 को बड़ी सभा की उपस्थिति में कानपुर स्टेशन पर यह सेवा कानपुर- ब्रह्मवर्त खंड पर संचालित की गई। 73 यात्रियों के बैठने की क्षमता वाली दो रेल कार बैक टू बैक जुड़ी हुई थी।
कार को इटली के ट्यूरिन में फिएट कंपनी द्वारा आधुनिक सुविधाओं जैसे पंखे, हल्की क्षैतिज खिड़कियां, बाथरूम आदि के साथ बनाया गया था। पूर्वोत्तर रेलवे के दस्तावेज त्रिवेणी ऑफ रेलवे के मुताबिक लखनऊ कानपुर एमजी पर स्वदेशी डीजल रेल कारें खंड एनईआर ने 22 अगस्त 1971 को लखनऊ और कानपुर के बीच स्वदेशी रूप से निर्मित डीजल रेल कारों को पेश किया, जो इतालवी निर्मित फिएट डीजल रेल कारों की जगह ले रही थी।
आयातित रेल कारों ने रखरखाव की एक बड़ी समस्या प्रस्तुत की क्योंकि स्पेयर पार्ट्स स्थानीय रूप से उपलब्ध नहीं थे। स्वदेशी विनिर्माताओं की अल्प मांग के कारण पुर्जों के विकास में कोई दिलचस्पी नहीं थी। इसके अलावा पुर्जों के आयात का मतलब विदेशी मुद्रा है जिसे देश बर्दाश्त नहीं कर सकता।
इन रेल कारों की डिजाइनिंग आरडीएसओ लखनऊ द्वारा की गई थी और इन्हें आईसीएफ, पेरुंबुर, मद्रास द्वारा बनाया गया था। कारों के लिए ट्रांसमिशन गेयर की आपूर्ति पूना के मेसर्स किर्लोस्कर न्यूमेटिक कंपनी लिमिटेड द्वारा की गई थी।
गौर करने वाली बात है कि फिएट डीजल रेल कारों में फ्लोर बोर्ड के नीचे इंजन की वजह से होने वाला कंपन इतना तेज था कि ऊपर की सीटें तक चकरा जाती थीं। स्वदेशी रूप से बनी नई रेल कारों में इस चिड़चिड़े खड़खड़ाहट को समाप्त कर दिया गया।