गोरखपुर। आंखों के तिरछेपन यानी भेंगापन से परेशान मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के नेत्र रोग विभाग में इस बीमारी का प्रभावी इलाज शुरू हो चुका है। यहां आधुनिक तकनीकों के जरिये सर्जरी कर मरीजों की नजर सीधी की जा रही है, जिससे न केवल उनकी दृष्टि सुधर रही है बल्कि आत्मविश्वास भी लौट रहा है।
एम्स के नेत्र रोग विभाग में भेंगापन के इलाज के लिए विशेष टीम गठित की गई है, जिसकी अगुवाई विभागाध्यक्ष डॉ. रिचा अग्रवाल कर रही हैं। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सप्ताह में एक दिन विशेष क्लिनिक भी संचालित किया जा रहा है, जहां इस समस्या से ग्रसित मरीजों का विस्तृत परीक्षण और इलाज किया जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, समाज में लगभग छह से सात प्रतिशत लोग भेंगापन से प्रभावित हैं। एम्स में पिछले डेढ़ साल में 55 मरीजों की सफल सर्जरी की जा चुकी है। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अलका त्रिपाठी ने बताया कि विभाग की ओपीडी में रोजाना 200 से 300 मरीज पहुंचते हैं, जिनमें कम से कम तीन मरीज भेंगापन के होते हैं। इनमें ज्यादातर बच्चे और किशोर शामिल हैं, जिनकी उम्र चार से 15 वर्ष के बीच होती है।
डॉक्टरों के मुताबिक, भेंगापन केवल दृष्टि से जुड़ी समस्या नहीं बल्कि इसका असर व्यक्ति के व्यक्तित्व पर भी पड़ता है। इससे चेहरे की बनावट प्रभावित होती है और मरीजों में आत्मविश्वास की कमी देखने को मिलती है। यदि समय पर इलाज न कराया जाए तो यह समस्या आगे चलकर गंभीर रूप ले सकती है। यहां तक कि अंधेपन का खतरा भी बढ़ जाता है। सर्जरी के दौरान आंखों की चार से पांच मांसपेशियों को संतुलित कर नजर को सीधा किया जाता है।