गोरखपुर। गायक राम दरश शर्मा ने अरविंद ''''''''अकेला के, केहू के दुख नाहीं पहुंचे, तहरे बोली से, बिटिया धीरे से उतरिह तूं डोली से, गीत का सफल गायन करके समारोह के हृदय को गहराई से स्पर्श किया।
भोजपुरी संगम के तत्वावधान में अरविंद ''''''''अकेला'''''''' के काव्य संग्रह ''''''''अँजुरी भरि गीत'''''''' का लोकार्पण डॉ. आद्या प्रसाद द्विवेदी की अध्यक्षता एवं डॉ. फूलचंद प्रसाद गुप्त के संचालन में हनुमंत नगर, पादरी बाजार, गोरखपुर में संपन्न हुआ। इस दौरान हृदयानंद शर्मा ने कहा कि प्रस्तुत पुस्तक समाज की विभिन्न विसंगतियों पर सबल प्रहार करती हुई सराहनीय रचनाओं का संकलन है। त्रिलोकी नाथ त्रिपाठी ''''''''चंचरीक'''''''' ने कहा कि ''''''''अकेला'''''''' की कविताएं पारिवारिक विघटन एवं झूठ के फैलते विषदंत के विरुद्ध आत्मा से निकली हुई आवाने हैं। इं. राजेश्वर सिंह ने 101 कविताओं के सुंदर संकलन के लिए ''''''''अकेला'''''''' को बधाई देते हुए उनके रचनात्मक निरंतरता की मंगलकामना की।
विशिष्ट अतिथि आरके भट्ट ''''''''बावरा'''''''' ने कहा कि अकेला की रचनाएं प्रेम एवं संवेदना की गहराई में डूब कर रची गई भावुक एवं आत्मिक प्रस्तुतियां हैं, जो अपनी प्रौढ़ावस्था के साथ विद्यमान हैं। मुख्य अतिथि चंदेश्वर ''''''''परवाना'''''''' ने कहा की पहलवानी काया के अंदर एक सुकोमल गीतकार का मिलना सुखद आश्चर्य है। इनके गीतों में ठेठ भोजपुरी के सुंदर व समर्थ शब्दों को मजबूती से स्थापित किया गया है।
इस दौरान -
पिया परदेसे, भेजें चिट्ठियो न पाती राम,
केसे-केसे कहीं, सहीं केहि भाँती राम।
युवा कवि अश्विनी द्विवेदी ''''''''नमन'''''''' ने अकेला के इस गीत का संजीदा गायन प्रस्तुत कर माहौल को भावुक किया।
लोकार्पण कार्यक्रम में रवींंद्र मोहन त्रिपाठी, वीरेंद्र मिश्र ''''''''दीपक'''''''', बागेश्वरी मिश्र ''''''''वागीश'''''''', चंद्रगुप्त वर्मा ''''''''अकिंचन'''''''', ओम प्रकाश पांडेय सहित अन्य कई लोग उपस्थित रहे।