गोरखपुर। फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा से पहले होलाष्टक की शुरुआत रविवार से हो गई है। यह 24 मार्च तक यानी आठ दिनों का होगा। मान्यताओं के अनुसार, होलाष्टक के आठ दिनों में सभी मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएंगे। हालांकि, सभी धार्मिक अनुष्ठान जारी रहेंगे। 24 को होलिका दहन के साथ होलाष्टक का समापन होगा।
ज्योतिर्विद मनीष मोहन ने बताया कि होली से पहले आठ दिनों तक का समय होलाष्टक के नाम से जाना जाता है। अष्टमी तिथि के दिन चंद्रमा, नवमी तिथि को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को बृहस्पति, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल और पूर्णिमा तिथि के दिन राहु उग्र स्वरूप में माने गए हैं।
होलाष्टक के दौरान ग्रहों के उग्र होने कारण व्यक्ति के निर्णय लेने की क्षमता में कमी आ जाती है। इससे लाभ के स्थान पर हानि की संभावना बढ़ जाती है।
ये जातक रहें सतर्क
ज्योतिर्विद पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, कुंडली में नीच राशि के चंद्रमा और वृश्चिक राशि के जातक, छठें या आठवें भाव के चंद्रमा वाले जातकों को इस दौरान विशेष सावधानी और सतर्कता बरतने की जरूरत है। होलाष्टक के दौरान वैवाहिक मुहूर्त, वधु प्रवेश, द्विरागमन, मुंडन, नामकरण, अन्नप्राशन, देव प्रतिष्ठा, नवगृह निर्माण व प्रवेश, नव प्रतिष्ठारंभ कार्य वर्जित रहते हैं।