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Gorakhpur News: आरक्षण पर भारत बंद से किसी ने बनाई दूरी, किसी ने निभाई औपचारिकता

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आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति ने भारत बंद का किया था आह्वान
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संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। ओबीसी की तरह एससी-एसटी में क्रीमीलेयर लागू करने के लिए सुप्रीमकोर्ट ने आदेश दिया तो उस आदेश के खिलाफ उससे जुड़े लोगों में उबाल आ गया। उसके विरुद्ध अनुसूचित जाति जनजाति संगठन तथा आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति ने 21 अगस्त को भारत बंद का आह्वान कर दिया। बसपा जैसी पार्टियों ने खुल कर समर्थन किया। लेकिन, आरक्षण पर सियासत करने वाले तथा हर बात पर संविधान दिखाने वाले दल या तो मैदान में आए नहीं, यदि कोई आया तो महज औपचारिकता निभाकर चला गया। इसको लेकर उस दल के लोग ही सवाल उठा रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने एक अगस्त को अपने एक फैसले में कहा कि जिस तरह से क्रीमीलेयर ओबीसी श्रेणी में लागू है, उसी तरह से एससी -एसटी में भी लागू किया जाए। न्यायालय के निर्णय पर कुछ राजनेताओं ने इसे अनुचित करार दिया तथा सरकार से मांग की कि संविधान संशोधन कर इस निर्णय को खत्म किया जाए। इस पर प्रधानमंत्री ने 9 अगस्त को अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने अपनी व्यवस्था दी है। लेकिन वह पहले से जो व्यवस्था बनी है उससे कोई छेड़छाड़ नहीं करने जा रहे हैं। बाबा साहब डॉ. भीम राव आंबेडकर ने संविधान में जो व्यवस्था दी है उसमें कोई बदलाव नहीं होगा ।
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प्रधानमंत्री के वक्तव्य के बाद भी अनुसूचित जाति जनजाति संगठन और आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति ने भारत बंद का आह्वान किया तो बहुजन समाज पार्टी ने खुलकर समर्थन किया। पूर्व सीएम मायावती ने पहली बार अपने कार्यकर्ताओं को बंद के लिए सड़क पर उतरने का आह्वान किया। लेकिन, लोकसभा चुनाव में संविधान खतरे में होने का नारा देने वाले कांग्रेस जैसे राजनीतिक दल बंंद से दूर रहे। जबकि संविधान खतरे में कहने वाले सपा नेताओं ने सिर्फ औपचारिकता निभाई।
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देर रात मैसेज आया...शांतिपूर्वक बंद का समर्थन करना
सपा नेताओं को देर रात यह मैसेज आया कि शांतिपूर्वक बंद का समर्थन करना है। इस नाते पार्टी के नेताओं ने ज्ञापन देकर अपनी औपचारिकता पूरी कर ली। जबकि आरक्षण के मुद्दों पर बंद का आह्वान किया गया था। किसी दल के नेता ने किसी दुकान पर या किसी सरकारी प्रतिष्ठान जाकर बंद करने का कोई प्रयास नहीं किया। इससे यह स्पष्ट हो गया कि जिन लोगों ने बंद का समर्थन किया था, वह महज औपचारिकता निभा रहे थे।
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