फुलवरिया के दिलीप हादसे में काफी चोटिल हो गए थे। डॉक्टर ने उन्हें आराम की सलाह दी थी। बिना सहारे के नहीं चल पा रहे थे, लेकिन वोट देने के जज्बे से खुद को रोक नहीं सके। वाकर के सहारे बूथ तक पहुंचे। घर से आने में 20 मिनट से ज्यादा समय लगा, थोड़ी तकलीफ भी हुई। लेकिन, वोट देना था इसलिए तकलीफ सहकर मतदान करने पहुंचे।
85 साल की उम्र में भी दिखा वोट देने का जज्बा
शिवाजी नगर वार्ड के महुई सुघरपुर इलाके की समुनरी देवी की उम्र 85 साल है। उम्र ज्यादा हो गई है। लिहाजा चलने फिरने में दिक्कत होती है। डंडे का सहारा लेना पड़ता है। हर बार की तरह इस बार भी वोट देना था। इसलिए डंडा के सहारे सेंट जेवियर स्कूल में मतदान करने पहुंची। कहा कि हर चुनाव में निश्चित तौर पर मतदान करती हूं।
इन बुजुर्गाें ने भी डाले वोट
106 वर्ष के केएल गुप्ता ने भी किया मतदान
एनई रेलवे मजदूर यूनियन के महामंत्री केएल गुप्ता वर्तमान समय में 106 वर्ष हैं। बृहस्पतिवार को उन्होंने नगर निकाय चुनाव में मतदान करके अपने अनुभवों को साझा किया है। बताया कि रेल की सेवा करने के बाद अब वह कर्मचारियों की लड़ाई लड़ते हैं। कहा कि 21 साल के जब वे हुए, तबसे मतदान करते आ रहे हैं। बृहस्पतिवार को वह पुर्दिलपुर में इस उम्र में वोट देकर उन लोगों को संदेश दिए जो मतदान के दिन घर से निकलने से परहेज करते हैं।
99 साल की जोखनी से सीखें
वार्ड नंबर 18 के मतदान स्थल नीना थापा इंटर काॅलेज में सुबह साढ़े सात बजे जोखनी देवी नामक एक बुजुर्ग महिला परिवार के सदस्याें के साथ वोट देने पहुंची। जोखनी ने बताया कि उनकी उम्र 99 पार हो गई है। एमपी, एमएलए के अलावा गांव में प्रधानी से लेकर नगर निगम में 50 बार वोट कर चुकी हैं। बुलंद हौसले से बोलीं, अभी तो न जाने कितनी बार वोट डालूंगी।
82 की उम्र में बटन दबाना सीख गईं किसमती
नीना थापा इंटर काॅलेज बूथ पर ही वोट देने पहुंची 82 वर्षीय किसमती देवी ने बताया कि वह जब चुनाव होता है, वोट देने आती है। बताती हैं कि पहले ठप्पा लगता था। कागज पर चुनाव चिह्न रहता था। अब ईवीएम से वोट पड़ रहे हैं। बटन दबाना अब सीख गई हूं। लेकिन, तमाम ऐसे युवा और अन्य लोग हैं जो मतदान के दिन घर से नहीं निकलते है। यह सुनकर कष्ट होता है।
दिव्यांग मतदाता
ट्राइसाइकिल पर पहुंचे वोट देने
टीडीएम इंटर कॉलेज में बृहस्पतिवार को रायगंज वार्ड नंबर 57 का मतदान हो रहा था। दोपहर तीन बजे के करीब अपनी ट्राइसाइकिल से मोहम्मद वालिद बूथ की तरफ आते दिखे। पूछने पर बताया कि पांच वर्ष के थे, तो तबीयत खराब होने से वे दिव्यांग हो गए। जब से मतदाता बने हैं, हर बार लोकतंत्र के महापर्व में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते हैं। पहले लाठी डंडे के सहारे मतदान के लिए आते थे। परिजन बोलते थे कि खुद लेकर चल रहे, लेकिन खुद की बीमारी परिजनों के लिए बोझ न बनें, इसलिए अकेले ही आते थे। पिछले चुनावों से ट्राई साइकिल से आकर वोट डाल रहे हैं।