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Gorakhpur News: सीओपीडी और फेफड़े के कैंसर का सबसे बड़ा कारण है धूम्रपान

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-नो स्मोकिंग डे पर विशेष
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- सीओपीडी के मरीज को हार्ट अटैक व फालिस का खतरा दूसरों की तुलना में अधिक होता है
-35 प्रतिशत से अधिक व्यस्क दूसरे की स्मोकिंग के चलते संपर्क में आते हैं

अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। हर फिक्र को धुएं में उड़ाने की आदत व्यक्ति की सांस और दिल को कमजोर बना रही है। क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज जिसे सीओपीडी के नाम से भी जाना जाता है। इसका सबसे बड़ा कारण धूम्रपान है। इसके अलावा फेफड़े के कैंसर का 90 प्रतिशत कारण अकेले धूम्रपान है। इतना ही नहीं सीओपीडी के मरीज को हार्ट अटैक और फालिस का खतरा अन्य लोगों से दो गुना अधिक होता है। बुधवार को नो स्मोकिंग डे है, और शहर के डॉक्टर इस अवसर पर लोगों को धूम्रपान छोड़ने की सलाह दे रहे हैं।
ग्लोबल एडल्ट टोबैको के सर्वे-2 (2016-17) के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में 13 प्रतिशत व्यस्क धूम्रपान करते हैं। वहीं 35 प्रतिशत से अधिक व्यस्क दूसरे की स्मोकिंग के चलते संपर्क में आते हैं। केजीएमयू लखनऊ के रेस्पिरेट्री मेडिसिन विभाग के डॉ. सूर्यकांत बताते हैं कि धूम्रपान करने वालों के फेफड़ों तक तो करीब 30 फीसदी ही धुंआ पहुंचता है। शेष 70 फीसदी धुआं आसपास के लोगों को प्रभावित करता है। धूम्रपान का सर्वाधिक दुष्प्रभाव बच्चों और गर्भवती पर पड़ता है, क्योंकि वह शुरुआत से ही धुएं के घेरे में आ जाते हैं।
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज के चेस्ट रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अश्विनी मिश्रा बताते हैं कि धूम्रपान के चलते फेफड़े के वायु मार्ग सिकुड़ जाते हैं। इस वजह से व्यक्ति को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। इसका असर फेफड़ों के साथ दिल व शरीर के अन्य अंगों पर भी पड़ता है। सीओपीडी के मरीजों में हार्ट अटैक और फालिस के अटैक का खतरा दूसरों की अपेक्षा दोगुना होता है। वहीं महिलाओं और बच्चों के फेफड़े धुएं के चलते जल्द खराब होते हैं।
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