जो पच्चीस फीसदी यानी दो हजार और तीन हजार रुपये राज्यांश है वह भी तीन चार माह में एक बार मिलता है। मदरसा आधुनिक शिक्षक मो. आजम अंसारी कहते हैं कि मदरसा शिक्षकों की कमर कोरोना और लॉकाउन ने तोड़ दी। महामारी से पहले टीचर होम ट्यूशन कर या लिखा पढ़ी का काम कर परिवार चला रहे थे। लॉकडाउन में ट्यूशन बंद हुईं, दुकानें और संस्थान बंद होने के कारण लिखापढ़ी का काम भी खत्म हो गया।
महीनों से मानदेय नहीं मिलने के कारण पहले से ही आर्थिक तंगी से गुजर रहे टीचरों के पास परिवार चलाने के लिए ई रिक्शा, सब्जी बेचने जैसे काम करना मजबूरी हो गई। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी आशुतोष पांडे ने बताया कि मदरसा आधुनिक शिक्षकों के मानदेय का केंद्रांश काफी समय से रुका हुआ है। केंद्रांश की धनराशि जारी होने पर शिक्षकों के खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी।