गोरखपुर जिला अस्पताल की बात करें तो इक्का-दुक्का मरीज ही पेट संबंधी बीमारी के आ रहे हैं। जबकि पहले हर दिन पांच से सात मरीज पेट दर्द की शिकायत लेकर पहुंचते थे। अब ऐसे मरीजों की संख्या न के बराबर है।
कम हो गई मरीजों की संख्या
आईएमए के सचिव डॉ. वीएन अग्रवाल ने बताया कि कोविड के डर से मरीजों की संख्या कम हो गई है। इस वक्त इमरजेंसी में ही मरीज आ रहे हैं। लोग अब पहले की अपेक्षा जागरूक हो गए हैं। मर्ज होते ही अस्पतालों की ओर रुख कर रहे हैं। जबकि पहले ऐसा नहीं था। खुद ही दवा खा लेते थे। ठीक न होने पर डॉक्टर के पास आते थे।
15 प्रतिशत मरीज पहुंच रहे नर्सिंग होम
नर्सिंग होम एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. खालिद अब्बासी ने बताया कि इस वक्त नर्सिंग होम में करीब 15 प्रतिशत मरीज आ रहे हैं। पहले नेपाल से लेकर बिहार सहित देवरिया, बस्ती, सिद्धार्थनगर सहित अन्य जिलों से मरीज आते थे। अब यह मरीज अपने ही जिलों में ही डॉक्टरों से परामर्श ले रहे हैं।
ऑनलाइन विकल्प भी मिला
कोविड महामारी और कोरोना कर्फ्यू के बीच मरीजों को ऑनलाइन विकल्प मिला। कई निजी अस्पतालों के डॉक्टरों ने ऑनलाइन ओपीडी शुरू की। हालांकि इसके लिए उन्होंने कुछ फीस भी तय कर रखी थी। ऐसे में ऑनलाइन वीडियो कॉलिंग के जरिए भी मरीजों का इलाज किया है।