सिद्धार्थनगर। अंतरराष्ट्रीय सीमावर्ती जनपद होने के कारण सुरक्षा की दृष्टि से जनपद बहुत ही संवेदनशील माना जाता है। दो वर्ष पूर्व नेपाल बाॅर्डर पर भीड़-भाड़ के बीच कटरा में हुए विस्फोट ने सबको दहला दिया था।
पटाखे की गूंज तीन किलोमीटर अंदर नेपाल में सुनाई पड़ी थी। पटाखा बाॅर्डर तक पहुंच गया, इसकी जांच में पटाखों की आपूर्ति का कनेक्शन कानपुर और लखनऊ से जुड़ा था। वहीं इस बार तो इटवा कस्बा में बारूद की बरामदगी ने हलचल मचा दी है। जांच एजेंसियां इसे ही अवैध पटाखों को लांचिंग पैड मानकर लगातार छापेमारी कर रही हैं। पुलिस की छापेमारी में दो दिन में 26 क्विंटल से अधिक पटाखे पकड़े गए हैं। वह भी कस्बे में। इसमें भी कानपुर और लखनऊ का कनेक्शन होने के इनपुट मिल रहे हैं।
हालांकि, जांच के बाद ही यह पुख्ता हो पाएगा कि माल कहां से आ रहा था। क्योंकि जनपद में मात्र एक पटाखा बनाने का लाइसेंस है, जहां आधुनिक मॉडल के पटाखे बनाने की गुंजाइश नहीं है। सूत्रों की मानें तो जनपद में कोई इलाका बाकी नहीं है, जहां पर पटाखा डंप नहीं किया गया है। अगर सर्च अभियान चले तो बड़ी पैमाने पर जब्ती की कार्रवाई होगी, जिस हिसाब से इटवा में बरामदगी हुई है, ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि जनपद बारूद के ढेर पर है।
सामान के बीच छिपाकर करते हैं पटाखे लाने का काम : जनपद में अवैध पटाखों की बिक्री और धरपकड़ के मामले हुए हैं। पूर्व में हुई जांच में सामने आया था। उसमें पाया गया था कि किराना के सामान, सब्जी के ढेर और बर्तन के बीच में पिकअप और अन्य गाड़ियों का सहारा लेते हैं। उसी के बीच में पटाखे लेकर पहुंच जाते हैं। कई बार ऐसे भी मामले सामने आए हैं, ट्रक और पिकअप चालक को तैयार कर पटाखे की बिक्री की नकली रसीद रख देते हैं।
अगर रास्ते में पुलिस चेकिंग करती है तो उसे दिखाकर निकल जाते हैं। आस्थायी लाइसेंस पर दुकान करने वाले अल्ताफ ने बताया कि थोक विक्रेताओं की ऑडिट होती है। फायर और प्रशासन की टीम नियमित जांच करती है इसलिए टैक्स से बचने और अवैध कारोबार करने के लिए दो प्रकार का रजिस्टर रखते हैं। एक में बिना लाइसेंस वाले धंधेबाजों को मोटी रकम लेकर बेचते हैं।