फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Gorakhpur News: श्रीराम ने तोड़ा शिव धनुष, सीता ने डाली वरमाला

Sat, 14 Feb 2026 12:56 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
विज्ञापन
विज्ञापन
तरकुलवा। ग्राम सभा खैराट स्थित शिव मंदिर प्रांगण में आयोजित श्री रुद्र महायज्ञ के पांचवें दिन बृहस्पतिवार की रात में धनुष यज्ञ व सीता विवाह लीला का मंचन किया गया। लीला मंच पर जब प्रभु श्रीराम ने शिव का धनुष तोड़ा और सीता जी ने उनके गले में वरमाला डाली तो पूरा पंडाल भगवान श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। उपस्थित लोगों ने पुष्प वर्षा कर सीता-राम विवाह का स्वागत किया।
विज्ञापन

अयोध्या धाम से आई रामलीला मंडली के कलाकारों ने दिखाया कि राजा जनक ने गुरु शतानंद से आग्रह किया कि वह महर्षि विश्वामित्र को श्रीराम और लक्ष्मण सहित रंगभूमि में पधारने का आमंत्रण दें। महर्षि विश्वामित्र श्रीराम और लक्ष्मण को लेकर धनुष यज्ञ स्थल पर पहुंचे, जहां विभिन्न राजाओं ने अपने बल का प्रदर्शन किया, लेकिन कोई भी शिव धनुष को हिला तक न सका। इस पर राजा जनक क्रोधित होकर बोले कि मुझे ज्ञात होता कि यह पृथ्वी वीरों से रिक्त है तो मैं ऐसी प्रतिज्ञा कभी ना करता। यह सुनकर लक्ष्मण आवेश में आ गए। महर्षि विश्वामित्र की आज्ञा पर श्रीराम ने शिव धनुष को उठाया और प्रत्यंचा चढ़ाते वह तेज आवाज के साथ टूट गया। सीता रंगभूमि में पहुंची और श्रीराम के गले में जयमाला डाल दी। उधर, धनुष टूटने की आवाज सुन भगवान परशुराम क्रोधित होकर राजा जनक के दरबार में पहुंचे और बोले कि यह धनुष किसने तोड़ा है, मैं अपने फरसे से उसका संघार कर दूंगा। लक्ष्मण और परशुराम के बीच संवाद हुआ। श्री राम ने विनम्रता से परशुराम को सर प्रसंग बताया, तो विराम की दिव्यता पहचान कर शांत हो गए और उन्हें आशीर्वाद देकर चले गए। इसके बाद राजा जनक ने अपने दूध को अयोध्या भेज कर राजा दशरथ को विवाह का निमंत्रण दिया। यह संदेश पाकर अयोध्या नगरी में हर्ष की लहर दौड़ गई। इस मौके पर पूर्व प्रधान राम इकबालसिंह, नागेंद्र सिंह, शिवदयाल सिंह, रामाश्रय सिंह, बबलू यादव, मोहन शर्मा, जयराम गोंड, संजय शर्मा आदि मौजूद थे।
राम ने ताड़का का वध कर यज्ञ कराया सफल

देसही देवरिया। सहोदरपट्टी गांव स्थित शिव मंदिर पर चल रहे 11 दिवसीय रुद्र महायज्ञ के सातवें दिन श्रीधाम वृंदावन से आई राधा रसिक रामलीला मंडली के कलाकारों ने अपने मंचन में ताड़का वध, जनकपुर प्रस्थान, सीता स्वयंबर आदि प्रसंग का मंचन किया।
विज्ञापन

मंडली के कलाकारों ने दिखाया कि राक्षसों के उत्पात से ऋषि विश्वामित्र का यज्ञ सफल नहीं हो पा रहा था। यज्ञ सफल कराने के लिए वह अयोध्या पहुंचे। राम और लक्ष्मण की मांग की। राजा दशरथ दोनों सुकुमारों को देने से हिचकने लगे। कुलगुरु वशिष्ठ के समझाने से मान गए। राम और लक्ष्मण ने ताड़का और सुबाहु का वध कर मानव कल्याण के लिए यज्ञ को सफल कराया। इसी बीच राजा जनक के वहां से ऋषि विश्वामित्र को सीता स्वयंबर में आने का निमंत्रण पहुंचा। विश्वामित्र दोनों अयोध्याकुमारों के साथ जनकपुर पहुंचे। वहां राजा जनक के आतिथ्य से बहुत प्रसन्न हुए। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें