गोरखपुर। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व बुधवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। गीता वाटिका, गोपाल मंदिर, गोरखनाथ मंदिर, पुलिस लाइंस, जलकल समेत कई जगहों पर श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के कार्यक्रम आयोजित होंगे। इसको लेकर तैयारियां जोरों पर चल रही हैं।
यहां के प्रमुख राधाकृष्ण मंदिरों की बात करें तो पिपराइच रोड स्थित गीता वाटिका और मोहद्दीपुर में स्थित गोपाल मंदिर में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव 50 से अधिक वर्षाें से मनाया जा रहा है। यहां श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन मेला लगता है और बड़ी संख्या में भक्त, भगवान के जन्मोत्सव में शामिल होते हैं।
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गीता वाटिका
गोरखपुर शहर के असुरन-पिपराइच मार्ग पर स्थित गीता वाटिका राधा-कृष्ण भक्ति का प्रमुख केंद्र है। इस मंदिर की पहचान दुनिया भर में है। देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से पर्यटक यहां आकर राधा-कृष्ण की भक्ति में रम जाते हैं। गीता वाटिका की स्थापना संत भाईजी हनुमान प्रसाद पोद्दार ने की। यहां श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाने की परंपरा की शुरुआत करीब 70 वर्ष पूर्व भाईजी हनुमान प्रसाद पोद्दार ने की थी। पहले भाईजी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी गीता वाटिका परिसर स्थित अपने आवास में मनाते थे। 1985 से गीता वाटिका स्थित राधाकृष्ण जी के मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाने लगी। यहां जन्माष्टमी के दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर आस्था निवेदित करते हैं।
गोपाल मंदिर
शहर के मोहद्दीपुर में स्थित गोपाल मंदिर में हिंदू समाज के लोगों के साथ ही पंजाबी समाज के लोगों की गहरी आस्था है। गोपाल मंदिर की स्थापना वर्ष 1957 में पाकिस्तान से भारत आकर मोहद्दीपुर बसे पंजाबी समाज के लोगों ने ही की थी। यहां राधा-कृष्ण की मनमोहक मूर्ति स्थापित की गई है। इसके अलावा भी कई अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां यहां स्थापित हैं। मंदिर समिति के पदाधिकारियों के अनुसार, यहां पिछले 48 वर्षों से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व पंजाबी समाज की ओर से श्रद्धापूर्वक मनाया जा रहा है। जन्माष्टमी के दिन यहां मेले जैसा माहौल रहता है।