मंदिर के पुजारी शिवकुमार गिरी ने बताया कि लगभग दो सौ साल पूर्व बस्ती राजा शिकार खेलने जब यहां आए तो उनकी नजर इस शिवलिंग पर पड़ी। यहां भोलेनाथ को इस हालत में देख वे आहत हुए और फिर उस शिवलिंग की पूजा अर्चना कर यहां मंदिर स्थापित करा दिया।
भदेश्वरनाथ ग्राम निवासी रविन्द्र गिरी ने बताया कि मंदिर के निर्माण के कुछ वर्ष बाद यहां कुछ चोरों ने शिवलिंग को चुराने की कोशिश की थी। शिवलिंग को 50 फिट तक खोदा किन्तु तब भी इस शिवलिंग का अंतिम सिरा नहीं पा सके।
कहते हैं कि इस बीच बादल छा गए और बिजली कड़कने लगी। इसके बाद यहां चोरी कर रहे लोगों पर बिजली गिर गई, जिससे उनकी मौत हो गई। जिस बैलगाड़ी से वे चोरी कर शिवलिंग ले जाना चाहते थे वह भी पत्थर का हो गया, जो आज भी मंदिर की दाईं ओर स्थित है।