न्याय के देवता कहे जाने वाले शनिदेव की जयंती 10 जून को मनाई जाएगी। ऐसी मान्यता है कि ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को शनिदेव का जन्म हुआ था। शनि देव के पिता सूर्य देव हैं। शनिदेव अच्छे कर्म करने पर अच्छा और खराब कर्म करने पर खराब फल देते हैं। हनुमान भक्तों को शनि देव कभी भी परेशान नहीं करते हैं।
शनि जयंती का महत्व
पंडित मनीष मोहन ने बताया कि शनि जयंती के दिन शनिदेव की पूजा करने से लोगों पर शनि की खराब दृष्टि नहीं पड़ती है। जो लोग शनि की ढैय्या या साढेसाती से पीड़ित होते हैं, उनको आज के दिन पूजा से राहत मिलती है। शनि देव को कर्म फलदाता कहा जाता है। वे लोगों को उनके कर्मों के अनुसार फल देने के लिए जाने जाते हैं। शनि जयंती को शनि देव की पूजा से कुंडली के शनि दोष, ढैय्या, साढ़ेसाती आदि के अशुभ प्रभावों से मुक्ति मिलती है।
ऐसे करें शनि देव पूजा
पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, सुबह उठकर स्नानादि से निवृत होकर लकड़ी के एक पाट पर काला वस्त्र बिछाकर उस पर एक सुपारी रखकर उसके दोनों ओर सरसो के तेल का दीपक जलाकर धूप जलाएं। शनिदेव के इस प्रतीक स्वरूप को पंचद्रव्य, पंचामृत, इत्र आदि से स्नान करवाएं। इसके बाद अबीर, गुलाल, सिंदूर, कुमकुम व काजल लगाकर नीले फूल अर्पित करें। इसके बाद इमरती व तेल में तली वस्तुओं का नैवेद्य अपर्ण करें। इसके बाद फल भी अर्पित करें। पंचोपचार पूजन के बाद शनि मंत्र का कम से कम एक माला जप करें। शनि चालीसा का पाठ करें व अंत में शनिदेव की आरती करें।