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Gorakhpur News: नौ दिन होगी शक्ति की उपासना, मंदिरों में तैयारी पूरी

Mon, 08 Apr 2024 02:31 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
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गोरखपुर। नवरात्र मंगलवार से शुरू होगा। नवरात्र प्रतिपदा से नौ दिन तक देवी भक्ति मंदिरों में पूजा करेंगे। सुबह से रात में देवी मंदिरों में भक्तों का तांता लगने वाला है तो प्रमुख मंदिरों में तैयारी भी पूरी की जा रही है।
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देवी मंदिरों में भक्तों का मेला लगने वाला है। नवरात्र प्रतिपदा को काफी संख्या में भक्त व्रत रखेंगे और देवी की उपासना करेंगे। मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठान होंगे, जबकि सुबह शाम आरती में भक्तों की संख्या अधिक रहेगी। प्रमुख मंदिरों में एक दिन पहले ही दर्शन व आरती की तैयारी की गई है।
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तरकुलहा देवी मंदिर में लगा मेला
नवरात्र से पहले ही चौरीचौरा के देवीपुर के तरकुलहा देवी मंदिर में मेला लग गया है। मंदिर में भोर से ही श्रद्धालुओं का तांता लग जाएगा। मंदिर के पुजारी दिनेश त्रिपाठी ने बताया कि मंदिर में भक्तों की भीड़ को देखते हुए अस्थायी पुलिस चौकी बना दी गई है। नवरात्र में भोर में तीन बजे पट खुल जाएंगे और रात 11 बजे तक पूजा होगी। दोपहर 12 बजे भोग आरती और शाम सात बजे संध्या आरती होगी।
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बुजुर्ग बताते हैं कि तरकुलहा में प्राचीन देवी मंदिर है। अमर शहीद बंधु सिंह को गिरफ्तार करके अंग्रेजों ने उन्हें फांसी दी तो बार-बार फांसी का फंदा टूट जाता था। उसके बाद बंधु सिंह स्वयं माता से विनती कर फंदे पर झूल गए। उनके फंदे पर झूलते ही तरकुल का पेड़ टूट गया। उसके बाद मंदिर का नाम तरकुलहा देवी मंदिर पड़ गया।
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बुढि़या माई मंदिर, कुसुम्ही जंगल
शहर से करीब 11 किमी दूर बुढि़या माई मंदिर में काफी संख्या में लोग पूजा करने जाते हैं। नवरात्र में भोर में ही भक्त पहुंचने लगते हैं। मंदिर के पुजारी रामानंद ने बताया कि भोर में तीन बजे मंदिर का पट खुल जाता है और रात 11 बजे तक पूजा होती है। भगवती के शृंगार के बाद सुबह पांच बजे आरती होती है। दिन भर मंदिर खुला रहता है और शाम पांच बजे संध्या आरती होती है।
जनश्रुति है कि प्राचीन काल में कुसुम्ही जंगल में नाव से नदी पार करने वाले नाच पार्टी के लोगों को बुढि़या माई ने दर्शन दिया। जोकर को छोड़कर अन्य लोगों ने उनकी बातों का सम्मान करते हुए नाच नहीं दिखाई। उस दौरान लकड़ी का पुल टूटा और जोकर को छोड़कर नाच पार्टी के लोग डूब गए। मान्यता है कि मंदिर में पूजा करने वालों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। धीरे-धीरे भक्तों की भीड़ लगने लगी और अब नवरात्र के अलावा अन्य दिनों में भी मंदिर में काफी संख्या में लोग पूजा करने आते हैं।

काली मंदिर, गोलघर
काली मंदिर गोलघर में सुबह से रात तक भक्त दर्शन पूजन करने पहुंचते हैं। नवरात्र में भोर में चार बजे ही भगवती का शृंगार शुरू होता है और सुबह छह बजे आरती होती है। रात 12 बजे तक भक्त पूजा करते हैं। शाम सात बजे संध्या आरती होती है। मान्यता है कि मंदिर में मन्नत मांगने वाले भक्तों की मनोकामना पूरी होती है। यह मंदिर करीब 300 वर्ष प्राचीन है।
मंदिर के पुजारी कृष्ण गोपाल सैनी ने बताया कि मंदिर की पिंडी प्राचीन है। जैसे-जैसे भक्तों की संख्या बढ़ी, वैसे-वैसे मंदिर का विकास होता गया। उनके पूर्वज व रेलवे कर्मचारी फेंकू सैनी मंदिर में पूजा करते थे और उनके परिवार के लोग ही मंदिर की देखरेख और पूजा करते हैं। नवरात्र में मंदिर में पुरोहित दिन भर धार्मिक अनुष्ठान कराते हैं।
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