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Gorakhpur News: मुख्तार अंसारी गिरोह का शूटर था मुठभेड़ में ढेर मुस्तफिजुली

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गोरखपुर। रामनगर करजहा से कुशीनगर जाने वाली सड़क पर सोमवार देर रात एसटीएफ के साथ हुई मुठभेड़ में मारा गया मुस्तफिजुल हसन उर्फ बाबू मुख्तार अंसारी गिरोह का सक्रिय शूटर था। मुस्तफिजुल पर हत्या, हत्या के प्रयास और आपराधिक साजिश समेत कई गंभीर मुकदमे दर्ज थे। वह लंबे समय से फरार चल रहा था और उस पर एडीजी वाराणसी जोन की ओर से एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था।
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एसटीएफ इंस्पेक्टर सत्य प्रकाश सिंह के अनुसार मुस्तफिजुल हसन का नाम पूर्वांचल के कुख्यात अपराधियों में शामिल था। वह मुख्तार गिरोह से जुड़ा हुआ था और गिरोह के खास शूटर अलीशेर के साथ मिलकर कई आपराधिक वारदातों को अंजाम दे चुका था। वर्ष 2021 में उसने अलीशेर के साथ मिलकर आजमगढ़ के मेहनगर क्षेत्र में बसपा नेता कलामुद्दीन की हत्या की थी। इस सनसनीखेज हत्याकांड के बाद से वह फरार चल रहा था। मामले में उसके खिलाफ कुर्की और उद्घोषणा की कार्रवाई भी हो चुकी थी।
मुस्तफिजुल का आपराधिक सफर वर्ष 2008 में शुरू हुआ, जब उसने पुरानी रंजिश में अपने ही गांव के निवासी कलामुद्दीन पर गोली चलाकर जानलेवा हमला किया। इस मामले में उसके खिलाफ हत्या के प्रयास समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ। इसके बाद वर्ष 2011 में उसने गांव के ही एहतसाम हसन पर दिनदहाड़े फायरिंग कर जानलेवा हमला किया और फरार हो गया। इस मामले में भी पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर सकी।
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फरारी के दौरान ही वर्ष 2012 में उसने अपने गिरोह के सदस्यों के साथ मिलकर गांव के इरशाद आलम की हत्या कर दी। हत्या के इस मामले में भी उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ लेकिन वह पुलिस की पकड़ से दूर रहा। वर्ष 2013 में न्यायालय ने धारा 82 और 83 सीआरपीसी के तहत कार्रवाई करते हुए उसे मफरूर घोषित कर दिया था। एसटीएफ की कार्रवाई के साथ पूर्वांचल के एक लंबे समय से फरार और इनामी अपराधी का अंत हो गया। पुलिस का मानना है कि उसकी मौत से कई लंबित मामलों की कड़ियां सामने आने की संभावना है।
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