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Gorakhpur News: पूर्व ईडी के बेटों को नौकरी दिलाने के मामले में एम्स के कई एचओडी रडार पर

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- एम्स में पूर्व ईडी सुरेखा किशोर के बेटों की नियुक्ति का मामला
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- एम्स गोरखपुर के 12 डॉक्टरों को 11 व 12 मार्च को बुलाया गया
- हड्डी, सर्जरी, फार्माकोलॉजी, कम्युनिटी मेडिसिन व कैंसर रोग विभागाध्यक्ष शामिल
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान गोरखपुर में पूर्व कार्यकारी निदेशक सुरेखा किशोर के बेटों को नौकरी दिए जाने के मामले की जांच तेज हो गई है। अब जांच का दायरा विभागाध्यक्षों और संबंधित डॉक्टरों तक पहुंच गया है।
सूत्रों के अनुसार, एम्स गोरखपुर के 12 डॉक्टरों को 11 और 12 मार्च को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया गया है। इनमें हड्डी रोग, सर्जरी, फार्माकोलॉजी, कम्युनिटी मेडिसिन और कैंसर रोग विभाग के अध्यक्ष शामिल हैं। बताया जा रहा है कि नियुक्ति प्रक्रिया, उपस्थिति पंजिका, विभागीय निगरानी और वेतन निर्गमन से जुड़े बिंदुओं की भी जांच की जाएगी। यह देखा जाएगा कि संबंधित अधिकारियों की क्या भूमिका रही और क्या वे तत्कालीन ईडी के प्रभाव में कार्य कर रहे थे। कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता ने कहा कि जांच टीम की ओर से मांगे गए सभी दस्तावेज और तथ्य उपलब्ध करा दिए जाएंगे।
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जानकारी के अनुसार, डॉ. सुरेखा किशोर जून 2020 में एम्स की ईडी बनाई गई थीं। उन्होंने वर्ष 2021 में अपने बेटों को एम्स में नियुक्त किया था। सुरेखा किशोर के बेटे डाॅ. शिखर किशोर वर्मा का एम्स में चयन साक्षात्कार के आधार पर किया गया था। एक मार्च 2021 को जारी सूची में चुने गए चार नान एकेडमिक जूनियर रेजिडेंट मेडिकल की सूची में डाॅ. शिखर का नाम पहले स्थान पर था। 12 जुलाई को नान एकेडमिक जूनियर रेजिडेंट मेडिकल के लिए साक्षात्कार की अंतिम सूची जारी हुई। इसमें कार्यकारी निदेशक के दूसरे बेटे डाॅ. शिवल किशोर वर्मा का नाम पहले स्थान पर था। सिर्फ दो जेआर के पद पर नियुक्ति करनी थी। इसमें एक अनारक्षित और दूसरा अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित था। अनारक्षित पद पर डाॅ. शिवल किशोर वर्मा की नियुक्ति हुई जबकि अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित पद पर डाॅ. प्रीती गोंड की नियुक्ति की गई है। अनारक्षित पद की प्रतीक्षा सूची में डाॅ. विवेक मिश्र और आरक्षित पद की प्रतीक्षा सूची में डाॅ. राकेश गोंड को रखा गया। दोनों बेटों को 70-70 हजार रुपये प्रति माह वेतन दिया गया। आरोप था कि दोनों कभी एम्स में नहीं गए, ईडी के आवास में ही रहे।
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