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डीडीयू: पूर्वांचल में लोकगीतों की परंपरा प्राचीन, DDU भोजपूरी संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए हमेशा तत्पर

Tue, 15 Oct 2024 06:39 PM IST
रोहित सिंह अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर

सार

वह संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश एवं ललित कला एवं संगीत विभाग दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में बृहस्पतिवार को ललित कला एवं संगीत विभाग में 'भोजपुरी लोकगीत प्रस्तुतीपरक कार्यशाला' के शुभारंभ अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि बोल रहीं थीं।
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गोरखपुर विश्वविद्यालय( सांकेतिक) - फोटो : डीडीयू सोशल मीडिया पेज
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विस्तार
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दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि पूर्वांचल के लोकगीतों की परंपरा अति प्राचीन है यहां के लोकगीतों में एक अलग सी मिठास है। विभिन्न त्योहारों एवं शुभ आयोजनों पर गाए जाने वाले लोकगीतों की अपनी अपनी विशेषता है, जो मानव जीवन को और भी सुंदर एवं सरल बनाती है। उन्होंने आगे कहा कि भोजपुरी संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए गोरखपुर विश्वविद्यालय सदैव तत्पर रहेगा।
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वह संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश एवं ललित कला एवं संगीत विभाग दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में बृहस्पतिवार को ललित कला एवं संगीत विभाग में "भोजपुरी लोकगीत प्रस्तुतीपरक कार्यशाला" के शुभारंभ अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि बोल रहीं थीं।

13 दिन तक चलने वाला यह कार्यशाला महाकुंभ प्रयागराज- 2025 एवं मिशन शक्ति के अंतर्गत आयोजित किया गया है। इससे पूर्व कार्यशाला का उद्घाटन कुलपति ने दीप प्रज्वलन कर किया।
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इसके बाद ललित कला एवं संगीत विभाग के छात्र/ छात्राओं द्वारा कुलगीत एवं कार्यशाला के मुख्य प्रशिक्षक अंतराष्ट्रीय लोक गायक राकेश उपाध्याय द्वारा शारदा वंदना "हाथ जोड़ी तोहके मनाई आहो मोरी शारदा भवानी" गीत प्रस्तुति द्वारा कार्यक्रम की शुरुआत की गई। ललित कला संगीत विभाग की अध्यक्ष प्रो. उषा सिंह ने मुख्य अतिथि सहित सभी अतिथियों का पुष्प गुच्छ, अंग वस्त्र व संस्कृति विभाग का मोमेंटो देकर स्वागत किया।

अधिष्ठाता कला संकाय प्रो. राजवंत राव ने कहा कि भोजपुरी लोकगीतों की कला ईश्वरीय गुण है, जो कुछ विशेष लोगों में निहित होता है। अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. अनुभूति दुबे ने कहा कि भोजपुरी भाषा में बहुत विविधताएं है। जिसे बहुत सहजता से समझा जा सकता है।

कार्यक्रम का संचालन किरण उपाध्याय ने किया। इस अवसर पर भारतेंदु नाट्य अकादमी उत्तर प्रदेश के पूर्व अध्यक्ष रवि शंकर खरे, प्रो. सत्येंद्र कुमार सिंह, बिरजू महाराज कथक संस्थान उत्तर प्रदेश की उपाध्यक्ष डॉ. मिथिलेश तिवारी, डॉ. गौरी शंकर चौहान, डॉ. प्रदीप कुमार साहनी, डॉ. प्रदीप राजोरिया व संस्कृति विभाग से महेश दीक्षित समेत अनेक छात्र, छात्राएं उपस्थित रहें।
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