मुंशी प्रेमचंद जयंती के अवसर पर आयोजित संगोष्ठी में प्रो. राजवंत राव व अन्य।
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो. राजवंत राव ने कहा कि प्रेमचंद की रचनाओं का दायरा इतना व्यापक है कि समाज का कोई पक्ष उनकी दृष्टि से अछूता नहीं रहा। उनका साहित्य आज भी समाज का सशक्त दर्पण है।
वह शुक्रवार को हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा और पत्रकारिता विभाग में प्रेमचंद जयंती पर ''''प्रेमचंद और हमारा समाज'''' विषय पर आयोजित संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ईश्वर, टॉल्सटॉय और प्रेमचंद से कोई भी बात छिप नहीं सकती। मुख्य वक्ता डॉ. प्रेमव्रत तिवारी ने कहा कि प्रेमचंद की रचनाएं पठनीयता और विचार गंभीरता का अद्भुत संगम हैं। उन्होंने अपने समय की सामाजिक समस्याओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करते हुए जनचेतना को दिशा दी।
विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. कमलेश गुप्त ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य ही नहीं, उनका जीवन भी आज के समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। कार्यक्रम में कहानी एवं चित्रकला प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया गया। रीना यादव ने अपनी विजेता कहानी ''''गूगल पे'''' का पाठ किया। संचालन डॉ. सुनील कुमार व आभार ज्ञापन डॉ. प्रियंका नायक ने किया। इस अवसर पर प्रो. नित्यानंद श्रीवास्तव, प्रो. राजेश सिंह, डॉ. नरेंद्र कुमार, डॉ. संदीप यादव, ड. अभिषेक शुक्ल व डॉ. ऋतु सागर आदि की मौजूदगी रही।