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Gorakhpur News: एम्स में सख्ती तो बढ़ी पर मरीज माफिया सक्रिय

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निजी एंबुलेंस से मरीज को ले जाते परिजन: संवाद
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- निजी एंबुलेंस से मरीजों को बिचौलिए लेकर चले जाते हैं निजी अस्पताल
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- कार्रवाई और एंबुलेंस जब्त होने के बाद भी नहीं थम रहा सिलसिला
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। एम्स गोरखपुर में अब बिचौलियों ने अपने काम का तरीका बदल दिया है। अब परिसर के अंदर एंबुलेंस ठहर नहीं रहीं हैं। जब मरीज भर्ती होने के लिए सिस्टम से जूझ रहे होते हैं तो ये अपनी एंबुलेंस लेकर सीधे उनके पास पहुंच जा रहे हैं और मरीजों को लेकर अपने मनचाहे अस्पतालों में लेकर जाकर भर्ती करा रहे हैं।
शनिवार दोपहर एक बजे से लेकर ढाई बजे तक के बीच कुछ निजी एंबुलेंस एम्स परिसर में अंदर जातीं दिखीं। पहले ये एंबुलेंस परिसर में ही आईपीडी भवन के आसपास खड़ी रहतीं थीं, लेकिन अब एम्स परिसर में सख्ती बढ़ने के बाद अब ये अपनी गाड़ियों को परिसर से बाहर रखने लगे हैं। अगर इमरजेंसी के पास किसी गंभीर मरीज के परिजन उसे भर्ती कराने को लेकर परेशान दिखते हैं तो ये तुरंत अपनी गाड़ी लेकर उनके पास पहुंच जाते हैं। परिजनों को बहला-फुसलाकर मरीज को ले जाते हैं।
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गेट के इर्द-गिर्द घूमने वाले बिचौलियों की पैठ इतनी जबरदस्त है कि नंबर लगाने से लेकर डॉक्टर के लिखे पर्चे की दवा दिलाने तक का ठेका ले लेते हैं। हालांकि, सख्ती की वजह से ये एम्स परिसर में और सीधे ओपीडी से निकलने वाले मरीजों को नहीं घेर पा रहे हैं। लेकिन एम्स में इलाज के लिए आए गंभीर मरीजों की परेशानी का लाभ उठा कर उन्हें निजी एंबुलेंस के जरिये निजी अस्पतालों में ले जाते दिख रहे हैं। शनिवार को भी यही नजारा बना रहा।

एम्स के जनऔषधि केंद्र में भी हो रही दिक्कत
एम्स में शनिवार को डॉक्टर को दिखाने बाद देवरिया का मरीज जन औषधि केंद्र पहुंचा था। केंद्र पर पूछने पर दवाएं 87 रुपये की बताईं गईं, लेकिन थीं नहीं। मजबूरी में बाहर गए तो वहां इन्हीं तीन दवाओं के लिए 535 रुपये देने पड़े। बताया जाता है कि एम्स के जिम्मेदारों की तरफ से रोजाना सैकड़ों मरीजों को बाहर की महंगी दवाएं लिखी जाती हैं।
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निजी एंबुलेंस पर सख्ती को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। टीमें गोपनीय तरीके से भी जांच कर रही हैं और विभागीय संलिप्तता है या नहीं, इसकी भी जांच कराई जा रही है। एम्स मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाए उपलब्ध कराने के लिए है। अभी हाल में ही ऐसी एंबुलेंस पर करवाई भी की गई है।

- डॉ. विभा दत्ता, कार्यकारी निदेशक, एम्स
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