मध्य प्रदेश के भिंड में कार्यक्रम को संबोधित करने के बाद साध्वी ऋतंभरा को गोरखपुर आना था। पुलिस-प्रशासन ने उन्हें गिरफ्तार करने की तैयारी की थी। साध्वी ने अपने समर्थकों के माध्यम से सूचना भेजवा दी कि वे ट्रेन से पहुंच रही हैं। हकीकत में वे सड़क मार्ग से आईं थीं। बाल कृष्ण सराफ के आवास पर वे रुकी थीं।
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महानगर महिला विभाग प्रमुख अरुणा सिंह ने कहा कि 1988 से लेकर 1992 तक चार साल विहिप के प्रमुख नेताओं का केंद्र बिंदु गोरखपुर रहा। अयोध्या के करीब होने और श्रीरामजन्म भूमि आंदोलन से गोरक्षपीठ के जुड़ाव के चलते यहां गतिविधियां ज्यादा होती थीं। बड़े नेता अक्सर गोपनीय बैठकें कर हम लोगों को मार्गदर्शन देते थे।
महिला विभाग ने शहर ही नहीं, गांवों में भी भारी संख्या में महिलाओं को आंदोलन से जोड़ा और अयोध्या कारसेवा में भी वे गईं। पुष्पा मिश्रा, अमिता शर्मा फ्रंट पर रहकर मोर्चा संभालती थीं। बालकृष्ण सराफ की पत्नी विभाग महिला प्रमुख प्रकाशी देवी ने पर्दे के पीछे रहकर व्यवस्था में सहयोग करती थीं। कई बार दूसरे प्रांतों से आए महिला कारसेवकों के भोजन और ठहरने की जिम्मेदारी भी हमारी ही होती थी।