फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

श्रीराम मंदिर आंदोलन की यहां बनाई जाती थी गोपनीय रणनीति, तीन प्रांतों का केंद्र बन गया था गोरखपुर

Sat, 01 Aug 2020 11:33 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

  • विहिप नेताओं की सक्रियता से तीन प्रांतों का केंद्र बन गया था गोरखपुर
  • दूसरे राज्यों से आए कारसेवकों के साथ बनती थी गोपनीय रणनीति
विज्ञापन
बाबा गोरखनाथ। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

श्रीराम मंदिर आंदोलन के दौरान झारखंड, बिहार और बंगाल से आने वाले कारसेवकों का केंद्र गोरखपुर ही रहा। यहीं से आगे की रणनीति तैयार करके उन्हें भेजा जाता था। 

विज्ञापन


यही वजह है कि विहिप के वरिष्ठ उपाध्यक्ष आचार्य गिरिराज किशोर, विश्व हिंदू परिषद के प्रमुख अशोक सिंघल, चंपत राय, बजरंग दल के प्रमुख विनय कटियार यहां बैठकें कर कार्यकर्ताओं में जोश भरते रहे और आंदोलन की रणनीति तैयार की। गोरखपुर में तत्कालीन प्रांत संगठन मंत्री सूबेदार सिंह की भी गिरफ्तारी शंकर भवन, संघ कार्यालय से हुई थी।

इसे भी पढ़ें-  अयोध्या में भूमि पूजन से पहले राममय रहेगी गोरक्षनगरी
विज्ञापन


विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के पदाधिकारियों ने कई सालों तक दौरा कर गोरखपुर और आसपास में मजबूत टीम तैयार की थी। तत्कालीन महानगर अध्यक्ष डॉ. चक्रपाणि शुक्ला के घर पर सितंबर 1990 में विनय कटियार ने गुप्त रूप से बैठक की और योजना बनाई। इसके पूर्व अगस्त, 1989 में वरिष्ठ उपाध्यक्ष आचार्य गिरिराज किशोर आए थे। उन्होंने यहां कारसेवकों को सहेजने की योजना तैयार की थी। 

1990 में अशोक सिंघल भी गांधी गली, गोलघर स्थित बाल कृष्ण सराफ के आवास पर ठहरे थे। 30 अक्तूबर एवं दो नवंबर, 1990 को रामभक्तों पर अयोध्या में हुई कार्रवाई के बाद कारसेवकों के अस्थि कलश यात्रा के दौरान उन्होंने यहां पर कुछ प्रमुख पदाधिकारियों के साथ गोपनीय मंत्रणा की थी।

Trending Videos
विज्ञापन

और जब साध्वी ऋतंभरा ने दिया पुलिस को चकमा

मध्य प्रदेश के भिंड में कार्यक्रम को संबोधित करने के बाद साध्वी ऋतंभरा को गोरखपुर आना था। पुलिस-प्रशासन ने उन्हें गिरफ्तार करने की तैयारी की थी। साध्वी ने अपने समर्थकों के माध्यम से सूचना भेजवा दी कि वे ट्रेन से पहुंच रही हैं। हकीकत में वे सड़क मार्ग से आईं थीं। बाल कृष्ण सराफ के आवास पर वे रुकी थीं।

इसे भी पढ़ें- इस गांव में राजा दशरथ ने कराया था पुत्रेष्टि यज्ञ

महानगर महिला विभाग प्रमुख अरुणा सिंह ने कहा कि 1988 से लेकर 1992 तक चार साल विहिप के प्रमुख नेताओं का केंद्र बिंदु गोरखपुर रहा। अयोध्या के करीब होने और श्रीरामजन्म भूमि आंदोलन से गोरक्षपीठ के जुड़ाव के चलते यहां गतिविधियां ज्यादा होती थीं। बड़े नेता अक्सर गोपनीय बैठकें कर हम लोगों को मार्गदर्शन देते थे। 

महिला विभाग ने शहर ही नहीं, गांवों में भी भारी संख्या में महिलाओं को आंदोलन से जोड़ा और अयोध्या कारसेवा में भी वे गईं। पुष्पा मिश्रा, अमिता शर्मा फ्रंट पर रहकर मोर्चा संभालती थीं। बालकृष्ण सराफ की पत्नी विभाग महिला प्रमुख प्रकाशी देवी ने पर्दे के पीछे रहकर व्यवस्था में सहयोग करती थीं। कई बार दूसरे प्रांतों से आए महिला कारसेवकों के भोजन और ठहरने की जिम्मेदारी भी हमारी ही होती थी। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें