गोरखपुर जिले में गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य की गलत रिपोर्ट देने के मामले में जिन चार डॉक्टरों पर मुकदमा और अल्ट्रासाउंड सेंटर सील किया गया है, यह नियम के विपरीत है। इस मामले में डायग्नोसिस में कोई गलती नहीं हुई है। क्योंकि शोध में यह बात सामने आ चुकी है कि अल्ट्रासाउंड मशीन गर्भस्थ शिशु के लिंब को 18 फीसदी ही पकड़ पाती है। 82 प्रतिशत केस पकड़ में नहीं आता है। इसके बाद भी डॉक्टरों पर छल और धोखाधड़ी के केस दर्ज कर लिए गए हैं। इसे लेकर मुख्यमंत्री से रविवार यानी आज मुलाकात की जाएगी।
ये बातें आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के अध्यक्ष डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव और सचिव डॉ. वीएन अग्रवाल ने शनिवार को सीतापुर आई हॉस्पिटल स्थित आईएमए के कार्यालय में पत्रकारों से वार्ता के दौरान कहीं। सीएमओ की ओर से गठित मेडिकल बोर्ड पर सवाल उठाते हुए कहा कि उसमें कोई रेडियोलॉजिस्ट नहीं था, जो अल्ट्रासाउंड मशीन की सीमा को समझ सके।