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Sawan 2023: इस बार सावन के आठ सोमवार को होगी देवों के देव महादेव की पूजा, जानिए क्या है वजह

Mon, 26 Jun 2023 03:07 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर।

सार

ज्योतिषाचार्य मनीष मोहन के अनुसार, प्रतिपदा के स्वामी अग्नि, द्वितीया के ब्रह्मा, तृतीया के गौरी, चतुर्थी के गणनायक, पंचमी के सर्प, षष्ठी के स्कंद, सप्तमी के सूर्य, अष्टमी के शिव, नवमी के दुर्गा, दशमी के यम, एकादशी के स्वामी विश्वदेव, द्वादशी के भगवान श्रीहरि, त्रयोदशी के कामदेव, चतुर्दशी के शिव, अमावस्या के पितर और पूर्णिमा के स्वामी चंद्रमा हैं।
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Sawan 2023 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देवों के देव महादेव को प्रिय सावन मास की शुरुआत चार जुलाई से हो रही है। लेकिन, इस बार का सावन खास होने जा रहा है, क्योंकि 19 वर्षों के बाद इसमें अधिक मास लग रहा है। ऐसे में सावन इस वर्ष दो महीने का होगा। श्रद्धालु चार के बदले आठ सोमवार को महादेव का जलाभिषेक व पूजन- अर्चन करने का लाभ उठा सकेंगे। सावन मास का समापन 31 अगस्त को होगा।

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सावन पूजा का महात्म्य
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, सावन में शिवालयों में स्थापित, प्राण प्रतिष्ठित शिवलिंग या धातु से निर्मित शिवलिंग का गंगाजल व दुग्ध से रुद्राभिषेक करें। यह शिव को अत्यंत प्रिय है। वहीं उत्तरवाहिनी गंगाजल, पंचामृत का अभिषेक भी महाफलदायी है।

कुशोदक (ऐसा जल, जिसमें कुश घास की पत्तियां डाली गई हों) से व्याधि शांति, जल से वर्षा, दही से पशुधन, ईंख के रस से लक्ष्मी, मधु से धन, दूध से संतान की सुख समृद्धि और एक हजार मंत्रों सहित घी की धारा से भगवान शिव का अभिषेक करने से पुत्र व यश की वृद्धि होती है।
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दिनों का महत्व

पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, सावन मास में सोमवार ‘सोमवारी व्रत रोटका’ भी कहलाता है। इसे सोम या चंद्रवार भी कहते हैं। यह दिन भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। मंगलवार को मंगलागौरी व्रत, बुधवार को बुध गणपति व्रत, बृहस्पतिवार को बृहस्पति व्रत, शुक्रवार को जीवंतिका देवी व्रत, शनिवार को बजरंग बली व नरसिंह व्रत और रविवार को सूर्य व्रत होता है।

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तिथियों के देवता
ज्योतिषाचार्य मनीष मोहन के अनुसार, प्रतिपदा के स्वामी अग्नि, द्वितीया के ब्रह्मा, तृतीया के गौरी, चतुर्थी के गणनायक, पंचमी के सर्प, षष्ठी के स्कंद, सप्तमी के सूर्य, अष्टमी के शिव, नवमी के दुर्गा, दशमी के यम, एकादशी के स्वामी विश्वदेव, द्वादशी के भगवान श्रीहरि, त्रयोदशी के कामदेव, चतुर्दशी के शिव, अमावस्या के पितर और पूर्णिमा के स्वामी चंद्रमा हैं।
 
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व्रत और त्योहार

डॉ. जोखन पांडेय शास्त्री के अनुसार, प्रतिपदा को अशून्यन व्रत, द्वितीया को औदुंबर व्रत, तृतीया को गौरी व्रत, चतुर्थी को दूर्वा गणपति व्रत, पंचमी को उत्तम नाग पंचमी व्रत, षष्ठी को सूपोदन व्रत, सप्तमी को शीतला व्रत, अष्टमी और चतुर्दशी को शिव व्रत, नवमी को नक्त व्रत, दशमी को आशाव्रत, एकादशी को भगवान श्रीहरि व्रत, द्वादशी को श्रीधर व्रत, त्रयोदशी को प्रदोष व्रत, अमावस्या को पिठोरा व्रत, पूर्णिमा को उत्सर्जन, उपाकर्म, सभाद्वीप, रक्षाबंधन, श्रावणी पूर्णिमा सहित कई व्रत होते हैं।

इस तारीख को पड़ेंगे सोमवार
  • पहला सोमवार: 10 जुलाई
  • दूसरा सोमवार: 17 जुलाई
  • तीसरा सोमवार: 24 जुलाई
  • चौथा सोमवार: 31 जुलाई
  • पांचवा सोमवार: 07 अगस्त
  • छठवां सोमवार:14 अगस्त
  • सातवां सोमवार: 21 अगस्त
  • आठवां सोमवार: 28 अगस्त

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