सीएमओ डॉ. श्रीकांत तिवारी ने बताया कि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) इस तथ्य पर शोध करने जा रहा है कि मृतक के शरीर पर अधिकतम कितने देर तक कोरोना वायरस टिक सकता है। अलग-अलग सतह पर कोरोना के टिकने के संबंध में लैंसेट (पत्रिका) का अध्ययन तो है ही लेकिन कोरोना संक्रमण मृतक शरीर के बारे में कोई स्पष्ट अध्ययन उपलब्ध नहीं है। सावधानी ही संक्रमण से बचाव का सबसे बेहतर तरीका है।
अंतिम संस्कार से पहले बरती जाने वाली सावधानी...
- शव को सिर्फ एक बार परिजनों को देखने की इजाजत।
- शव जिस बैग में रखा गया है, उसे खोला नहीं जाएगा, बाहर से ही धार्मिक क्रिया करें।
- शव को स्नान कराने, गले लगने से पूरी तरह से मनाही।
- शव यात्रा में शामिल लोग अंतिम क्रिया के बाद हाथ-मुंह को अच्छी तरह से साफ करें और सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें।
सीएमओ डॉ. श्रीकांत तिवारी ने कहा कि जागरूकता के अभाव में कोरोना के प्रति तमाम भ्रांतियों का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। ऐसी सूचनाएं इस लड़ाई को कमजोर करेंगी। चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों और समुदाय का मनोबल टूटेगा। टूटे मनोबल के साथ इस बीमारी का मुकाबला घातक होगा। सैनिटाइज हो चुके संक्रमित के शव के बारे में भ्रांतियां न पालें। सावधानी रखेंगे तो संक्रमण नहीं होगा।