उर्स का आयोजन दरगाह के सरपरस्त सैयद मोहतसिम अली कबीर की देखरेख में संपन्न हुआ। सुरक्षा व्यवस्था के तहत एसएसबी के अधिकारी और जवान तैनात रहे, जिनकी निगरानी में कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हुआ। जुमा की नमाज के बाद लंगर का आयोजन किया गया, जिसमें सभी समुदायों के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
नार्मल स्थित दरगाह हजरत मुबारक खां शहीद के सालाना उर्स-ए-पाक के अंतिम दिन शुक्रवार को आयोजित कव्वाली मुकाबले में सूफियाना रंग छा गया। अंतरराष्ट्रीय कव्वालों की पेशकश पर अकीदतमंद देर रात तक झूमते रहे और दरगाह परिसर पूरी तरह रूहानी माहौल में डूबा नजर आया।
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उर्स के समापन अवसर पर देशभक्ति और भाईचारे का संदेश भी प्रमुख रहा। आखिरी दिन कुरआन ख्वानी, महफिल-ए-मिलाद और कुल शरीफ की रस्में अदा की गईं और देश में अमन-चैन और विश्व शांति के लिए दुआएं मांगी गईं।
दरगाह सदर इकरार अहमद ने कहा कि इस्लाम इंसानियत, समानता और भाईचारे का पैगाम देता है। इस दौरान सभी धर्मों के लोग एक साथ दुआ में शामिल हुए और हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल देखने को मिली।
उर्स का आयोजन दरगाह के सरपरस्त सैयद मोहतसिम अली कबीर की देखरेख में संपन्न हुआ। सुरक्षा व्यवस्था के तहत एसएसबी के अधिकारी और जवान तैनात रहे, जिनकी निगरानी में कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हुआ। जुमा की नमाज के बाद लंगर का आयोजन किया गया, जिसमें सभी समुदायों के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
दरगाह मुबारक खां शहीद पर उमड़ी अकीदतमंदों की भीड़
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
कव्वाली मुकाबले ने बांधा समां
रात में अंतरराष्ट्रीय कव्वाल सैम अली नियाजी (बदायूं) और इंतेजार साबरी (उत्तराखंड) के बीच शानदार मुकाबला हुआ। सूफियाना कलाम और बेहतरीन अदायगी ने माहौल को भाव विभोर कर दिया। अकीदतमंद देर रात तक झूमते रहे और कव्वाली का आनंद लेते रहे।
कार्यक्रम में हाजी खुर्शीद आलम खान, हाजी कलीम अहमद फरजंद, शमशीर अहमद शेरू, सैयद शहाब, अहमद हसन, कुतुबुद्दीन खान, रमजान खान आदि लोग मौजूद रहे।