गोरखपुर। पिता के संघर्षों की नींव पर खड़ी होती है बच्चों की सफलता की इमारत। वे केवल सपने ही नहीं दिखाते बल्कि उन्हें पूरा करने का हौसला भी देते हैं। वे केवल परिवार का आर्थिक आधार नहीं होते, बल्कि वे बच्चों के पहले शिक्षक, मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत भी होते हैं। वे अपने अनुभवों और संस्कारों से बच्चों को सही दिशा दिखाते हैं।
आज फादर्स डे केवल एक दिन नहीं, बल्कि उन अनगिनत त्याग, संघर्ष और समर्पण को याद करने का अवसर है, जिनकी बदौलत बच्चों के सपनों को उड़ान मिलती है। हर सफल व्यक्ति की कहानी के पीछे अक्सर एक ऐसे पिता की मेहनत छिपी होती है, जिसने अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए अपनी इच्छाओं और जरूरतों से समझौता किया।
जब डॉक्टरों ने उम्मीद छोड़ दी, पिता ने सपने देखना नहीं छोड़ा
ढाई साल की उम्र में जब पता चला कि आदित्या यादव न सुन सकती हैं और न बोल सकती हैं, तब उनके पिता दिग्विजयनाथ यादव के सामने बड़ी चुनौती थी। उन्होंने हार मानने के बजाय बेटी के सपनों को नई दिशा देने का फैसला किया। पूर्वोत्तर रेलवे में बैडमिंटन कोच दिग्विजयनाथ ने गोरखपुर से लेकर दिल्ली तक इलाज कराया, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसी दौरान अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग खिलाड़ी राजीव बग्गा से प्रेरित होकर उन्होंने चार साल की उम्र से आदित्या को बैडमिंटन का प्रशिक्षण देना शुरू किया।
नौकरी के साथ रोजाना अभ्यास और पढ़ाई की व्यवस्था करते हुए उन्होंने बेटी को आगे बढ़ाया। पिता के मार्गदर्शन और आदित्या की मेहनत का परिणाम यह रहा कि उन्होंने जिला, राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीते। राष्ट्रपति से बाल पुरस्कार प्राप्त कर चुकीं आदित्या अब एशिया चैंपियनशिप के लिए भारतीय टीम में जगह बनाने की तैयारी कर रही हैं। दिग्विजयनाथ कहते हैं कि विश्वास और मेहनत से हर चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है।
पिता के संस्कारों ने दिलाई सफलता
भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की मुख्य शाखा में मुख्य प्रबंधक के पद पर कार्यरत अमित शंकर अपनी सफलता का श्रेय पिता केसी गुप्ता को देते हैं। महावीरपुरम, गोरखनाथ निवासी अमित बताते हैं कि उनके पिता आकाशवाणी में वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। बचपन से ही उन्होंने उन्हें ईमानदारी, अनुशासन, समय की पाबंदी और मेहनत का महत्व सिखाया।
अमित के अनुसार, पिता ने हमेशा उन्हें कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने और निरंतर प्रयास करते रहने की प्रेरणा दी। उनके दिए संस्कारों और जीवन मूल्यों का सकारात्मक प्रभाव शिक्षा, व्यक्तित्व और पेशेवर जीवन पर पड़ा। यही सीख आगे चलकर बैंकिंग क्षेत्र में उनकी सफलता की आधारशिला बनी। अमित का मानना है कि पिता केवल परिवार के संरक्षक नहीं, बल्कि बच्चों के पहले शिक्षक और सबसे बड़े प्रेरणास्रोत भी होते हैं। उनकी हर उपलब्धि के पीछे पिता का त्याग, संघर्ष और मार्गदर्शन शामिल है, जिसके लिए वह स्वयं को सदैव उनका ऋणी मानते हैं।