नाम बदलकर प्रधान भी हो गई थी रुद्रांश की मां
रुद्रांश की मां का असली नाम अर्चना पांडेय था, लेकिन जालसाजी के मामले में ही फंसने के बाद उसने अपना नाम बदल कर बच्ची पांडेय कर लिया। पति का नाम भी उसने बदला और इसे मतदाता सूची में भी अपडेट कराया था। इसी आधार पर वह चुनाव लड़कर प्रधान भी हुई थी, लेकिन इसके बाद ही 100 करोड़ की जालसाजी के मामले में वह पकड़ी गई और फिर पूरा परिवार गांव से दूरी बना लिया। गांव के कई लोगों से भी उसने मुनाफे का लालच देकर जालसाजी की है। यही लोग अब पुलिस के मददगार भी बने हैं और पुलिस को आरोपी रुद्रांश व उसके परिवार के खिलाफ कई दस्तावेज सौंपे हैं। इस आधार पर भी पुलिस जांच को आगे बढ़ा रही है।
चालक रियाज के नाम पर लिए कई ऋण, लेकिन वह कंगाल ही
पुलिस की अब तक की जांच में यही पता चला है कि उसका चालक रहा रियाज के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर रुद्रांश पांडेय ने बैंक से ट्रक भी फाइनेंस कराया है, लेकिन असल में चालक रियाज जैसे पहले था, वैसे ही है। उसे महज नौ हजार रुपये महीने का वेतन ही मिलता है। पुलिस अभी उसके खातों की पूरी जांच कर रही है कि किसी में कहीं रुपये का लेनदेन तो नहीं हुआ है। अगर ऐसा पाया गया तो साफ होगा कि रियाज रुद्रांश का साथी है या फिर उसका भी रुद्रांश ने इस्तेमाल ही किया है। पुलिस की कोशिश है कि साक्ष्यों के आधार पर ही कार्रवाई की जाए, ताकि कोई दोषी जेल न चला जाए।