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एक-एक कर सामने आ रहे हैं बैक: दो और बैंकों से रुद्रांश ने ऋण लेकर की है जालसाजी, जांच तेज

Thu, 01 Feb 2024 11:33 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

एसपी सिटी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा कि कई और बैंकों से जालसाजी की जानकारी हुई है। जो भी प्रार्थना पत्र देगा, उसी आधार पर पुलिस जांच को आगे बढ़ाएगी। पुलिस पूरे प्रकरण की गहनता से जांच कर रही है। साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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बैंक से लोन लेकर हड़पने वाला जालसाज गिरफ्तार। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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गोरखपुर में फर्जी दस्तावेज की मदद से 4.45 करोड़ रुपये के ऋण लेकर जालसाजी करने के आरोपी रुद्रांश ने दो और बैंकों से ऋण लेकर जालसाजी की है। फाइनेंस कंपनी के सामने आने के बाद दो और बैंकों ने भी पुलिस से संपर्क किया है। अब पुलिस उनके प्रार्थनापत्र के इंतजार में है, जिसके बाद जांच को आगे बढ़ाया जाएगा।

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उधर, आईसीआईसीआई बैंक के दो कर्मचारियों से पुलिस ने फिर पूछताछ की है। अब तक की जांच में एक बात साफ हो चुकी है कि बैंक से दस्तावेज सत्यापन से लेकर ऋण देने तक चूक हुई है। अब यह जानबूझकर किया गया है या फिर अनजाने में गलती हुई है, इसकी जांच पुलिस गहराई से कर रही है।

जानकारी के मुताबिक, बोक्टा के पास स्थित एक बैंक से भी गाड़ी फाइनेंस कराकर जालसाजी की गई है। इसके अलावा एक अन्य प्राइवेट बैंक से भी इसी तरह की जालसाजी की बात सामने आई है, लेकिन अभी किसी ने प्रार्थना पत्र नहीं दिया है, इस वजह से इसकी जांच आगे नहीं बढ़ पाई है। पुलिस आरोपी रुद्रांश के माता-पिता की तलाश भी तेज कर दी है।
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रुद्रांश के बांसगांव के बगही गांव पर भी पुलिस गई थी। वहां पर भी उसके बारे में जानकारी हासिल की। गांव से भी पुलिस को परिवार द्वारा जालसाजी की जानकारियां मिली है और कुछ दस्तावेज भी हाथ लगे हैं। इसी आधार पर पुलिस अब पूरे जांच को आगे बढ़ा रही है।
 

नाम बदलकर प्रधान भी हो गई थी रुद्रांश की मां
रुद्रांश की मां का असली नाम अर्चना पांडेय था, लेकिन जालसाजी के मामले में ही फंसने के बाद उसने अपना नाम बदल कर बच्ची पांडेय कर लिया। पति का नाम भी उसने बदला और इसे मतदाता सूची में भी अपडेट कराया था। इसी आधार पर वह चुनाव लड़कर प्रधान भी हुई थी, लेकिन इसके बाद ही 100 करोड़ की जालसाजी के मामले में वह पकड़ी गई और फिर पूरा परिवार गांव से दूरी बना लिया। गांव के कई लोगों से भी उसने मुनाफे का लालच देकर जालसाजी की है। यही लोग अब पुलिस के मददगार भी बने हैं और पुलिस को आरोपी रुद्रांश व उसके परिवार के खिलाफ कई दस्तावेज सौंपे हैं। इस आधार पर भी पुलिस जांच को आगे बढ़ा रही है।

 

चालक रियाज के नाम पर लिए कई ऋण, लेकिन वह कंगाल ही
पुलिस की अब तक की जांच में यही पता चला है कि उसका चालक रहा रियाज के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर रुद्रांश पांडेय ने बैंक से ट्रक भी फाइनेंस कराया है, लेकिन असल में चालक रियाज जैसे पहले था, वैसे ही है। उसे महज नौ हजार रुपये महीने का वेतन ही मिलता है। पुलिस अभी उसके खातों की पूरी जांच कर रही है कि किसी में कहीं रुपये का लेनदेन तो नहीं हुआ है। अगर ऐसा पाया गया तो साफ होगा कि रियाज रुद्रांश का साथी है या फिर उसका भी रुद्रांश ने इस्तेमाल ही किया है। पुलिस की कोशिश है कि साक्ष्यों के आधार पर ही कार्रवाई की जाए, ताकि कोई दोषी जेल न चला जाए।
 
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ये है पूरा मामला
बस्ती के मुरलीजोत में रहने वाला रुद्रांश पांडेय अपनी मां अर्चना व पिता राजेश के साथ शाहपुर के राप्तीनगर, ग्रीन वैली में मकान बनवाकर रहता है। मई 2022 को अर्चना व उनके पति राजेश ने आईसीआईसीआई बैंक की मेडिकल काॅलेज रोड शाखा में होम लोन के लिए आवेदन किया। इसके लिए फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने के साथ ही दूसरे की भूमि को अपना बताकर 31 मई 2022 को दो करोड़ रुपये का लोन पास करा लिया। अगस्त 2022 में बालाजीपुरम राप्तीनगर में रहने वाले रियाज नाम के व्यक्ति ने होम लोन के लिए आवेदन किया।

खुद को भारतीय खाद्य निगम का ठेकेदार बताते हुए रियाज इंटरप्राइजेज के नाम से दस्तावेज प्रस्तुत किए। लोन पास कराने की पैरवी रुद्रांश कर रहा था। अगस्त में रियाज का भी 2.45 करोड़ रुपये का होम लोन पास हो गया। तीन माह के बाद किस्त जमा न होने पर बैंक के अधिकारियों ने खोजबीन शुरू की तो पता चला कि फर्जी दस्तावेज पर रुद्रांश ने अपनी मां अर्चना व रियाज के नाम पर लोन कराया है। इसके बाद पुलिस ने केस दर्ज कर मुख्य आरोपी को जेल भेजा।

एसपी सिटी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा कि कई और बैंकों से जालसाजी की जानकारी हुई है। जो भी प्रार्थना पत्र देगा, उसी आधार पर पुलिस जांच को आगे बढ़ाएगी। पुलिस पूरे प्रकरण की गहनता से जांच कर रही है। साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
 
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