फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Gorakhpur News: बालापार में पहुंचे राजस्व अधिकारी, किसानों के दस्तावेज खंगाले

विज्ञापन
विज्ञापन
- जंगल कौड़िया- जगदीशपुर रिंग रोड के निर्माण का मामला
विज्ञापन



संवाद न्यूज एजेंसी

गोरखपुर। जगदीशपुर जंगल कौड़िया रिंग रोड निर्माण के लिए किसानों की जमीन लेने की प्रक्रिया में जुुटे अधिकारियों ने किसानों के दस्तावेज देखने शुरू कर दिए हैं। शुक्रवार को तहसीलदार सदर विकास कुमार के नेतृत्व में राजस्व, भूमि अध्याप्ति एवं एनएचएआई के अधिकारियों ने बालापार गांव में जाकर किसानों से मुलाकात की और उनके कागजात भी देखे। छह माह के भीतर हुई रजिस्ट्री के आधार पर मुआवजा तय करने के लिए राजस्व अधिकारियों ने बालापार में जमीनों के बैनामा की जानकारी ली। अब टीम रिपोर्ट तैयार करके डीएम को सौंपेगी। इस तरह से अन्य गांवों में भी टीम पहुंचेगी। वहां बैनामा से संबंधित जानकारी लेकर कार्रवाई को आगे बढ़ाया जाएगा।

जंगल कौड़िया से जगदीशपुर रिंग रोड के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। कम मुआवजा मिलने की वजह से किसानों ने जमीन देने से इंकार कर दिया है। इससे प्रभावित हो रहे 26 गांवों के किसानों ने प्रदर्शन करते हुए मुआवजा बढ़ाने की मांग की थी। यह समस्या अन्य परियोजनाओं में भी सामने आ रही है। इसको देखते हुए डीएम ने संबंधित इलाकों में छह माह के भीतर हुए बैनामे की दरों की जांच करके उसका औसत निकालने का निर्देश दिया है। इसके आधार पर किसानों का मुआवजा तय करके भुगतान कराया जाएगा। डीएम ने राजस्व विभाग, एनएचएआई, विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी की संयुक्त टीम गठित की है। शुक्रवार को बालापार में पहुंची टीम ने 15 से अधिक किसानों से बातचीत करके जानकारी ली। टीम के सदस्यों ने अनिल चौधरी, विकास पांडेय, रामकुंवर पांडेय, रामेश्वर साहनी सहित अन्य लोगों से बातचीत की। टीम के सदस्यों ने बालापार टिकरिया रोड को पार करने वाली जंगल कौड़िया जगदीशपुर रिंग रोड के स्थानों को भी देखा। करीब एक घंटे तक टीम गांव में मौजूद रही। इसके बाद किसानों के बैनामा की छाया प्रति भी अधिकारी अपने साथ ले गए।
विज्ञापन
विज्ञापन

कोट
बालापार में किसानों के दस्तावेजों को देखने के लिए राजस्व, एनएचएआई और एसएलओ की संयुक्त टीम गई थी। किसानों से दस्तावेजों की छायाप्रति ली गई है। अन्य गांवों में भी टीम जाएगी। किसान जमीन देने को तैयार हैं। उनके साथ बातचीत करके जमीन अधिग्रहण के मामले को सुलझा लिया जाएगा।

कृष्णा करुणेश, डीएम
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें