सेवानिवृत्त सैन्य कर्मियों को बेटी की शादी तक के लिए आर्थिक सहायता नहीं मिल पा रही है। बेटी या फिर बेटे की पढ़ाई की छात्रवृत्ति भी फंसी है। इससे सेवानिवृत्त सैन्य कर्मी परेशान हैं। जिला सैनिक कल्याण बोर्ड कार्यालय के चक्कर भी लगा रहे हैं लेकिन कोई सटीक जानकारी नहीं मिल पा रही। आंख की रोशनी गंवाने वाले सैनिक विहार कॉलोनी के पारसनाथ यादव को बेटी की शादी के लिए आर्थिक सहायता नहीं मिल सकी। पारसनाथ ने अप्रैल 2018 में आवेदन किया था। गोरखपुर में 25 हजार से ज्यादा सेवानिवृत्त सैन्य कर्मी हैं।
केस 1
पारस नाथ ने सेना में लेफ्टिनेंट जनरल तक की गाड़ी चलाई। देवरिया के पूर्व सांसद व लेफ्टिनेंट जनरल श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी जब जनरल ऑफिसर कमांडिंग थे तो उनके परिवार को भी घुमाया। बाद में सेवानिवृत्ति हुए तो आंखें भी जवाब दे गईं। पिछले दो साल से भत्ते के लिए सैनिक कल्याण बोर्ड के कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता बेटी की शादी के लिए मांगें थे, जो अभी तक नहीं मिले। इस बीच कर्ज लेकर बेटी की शादी भी कर दी।
केस 2
अमित कुमार को एयरफोर्स से रिटायर हुए पांच साल हो गए। वे पिछले दो साल से बेटे की पढ़ाई के लिए बोर्ड से मिलने वाली छात्रवृत्ति के लिए दौड़भाग कर रहे हैं। जब भी छात्रवृत्ति की बात करते हैं तो उन्हें बजट समेत अन्य परेशानियां गिनाकर लौटा दिया जाता है। इससे बेटे की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। जिम्मेदारों तक मामला पहुंचाया गया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो सकी। मामला जहां का तहां फंसा है।