शोधार्थी गौतम का दावा है कि इस अध्ययन के नतीजे भविष्य में औद्योगिक इकाइयों, रासायनिक कारखानों, गैस संयंत्रों, खदानों और प्रदूषण की निगरानी करने वाले उपकरणों के लिए बेहतर गैस सेंसर विकसित करने में उपयोगी साबित हो सकते हैं। इससे जहरीली गैसों के रिसाव का समय रहते पता लगाकर बड़े हादसों को टालने में मदद मिलेगी। शोध में पहले यह सुनिश्चित किया गया कि इस्तेमाल किया गया पदार्थ स्थिर है और लंबे समय तक कार्य करने के लिए उपयुक्त है।
अब जहरीली गैसों के रिसाव से जान जाने के जोखिम को कम किया जा सकेगा। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) के शोधकर्ताओं ने ऐसा नेनो पदार्थ बनाया है जो कार्बन मोनोऑक्साइड और सल्फर जैसी जहरीली गैसों का रिसाव होते ही सटीक संकेत दे देगा। इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (ईसीई) विभाग के शोधकर्ताओं का यह अध्ययन फिजिक्स लेटर ए जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
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डॉ. बीपी पांडेय के निर्देशन व प्रो. आरके चौहान, नेहा मिश्रा और संतोष कुमार के योगदान से रिसर्च स्कॉलर गौतम जायसवाल की यह खोज मानव जीवन की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। डॉ. बीपी पांडेय ने बताया कि शोध के दौरान टंगस्टन सल्फाइड डाइसेलेनाइड नामक एक बेहद पतले पदार्थ की दो अलग-अलग संरचनाओं का अध्ययन किया गया।
कंप्यूटर आधारित तकनीक से यह जांचा गया कि इन गैसों के संपर्क में आने पर इस पदार्थ के विद्युत गुणों में बदलाव आता है। यही बदलाव गैस की पहचान का आधार बनता है। अध्ययन में सामने आया कि गैसें इस पदार्थ की सतह से हल्के रूप में जुड़ती हैं।
इससे सेंसर का बार-बार उपयोग करना आसान होगा और उसकी कार्यक्षमता भी लंबे समय तक बनी रह सकती है। तीनों गैसों में हाइड्रोजन सल्फाइड और सल्फर डाइऑक्साइड का प्रभाव सबसे अधिक देखा गया। इन गैसों के संपर्क में आने पर सेंसर के विद्युत गुणों में सबसे अधिक बदलाव आया। इससे इनके रिसाव का समय रहते पता लगाया जा सकता है।
हादसों को टालने में मिलेगी मदद
शोधार्थी गौतम का दावा है कि इस अध्ययन के नतीजे भविष्य में औद्योगिक इकाइयों, रासायनिक कारखानों, गैस संयंत्रों, खदानों और प्रदूषण की निगरानी करने वाले उपकरणों के लिए बेहतर गैस सेंसर विकसित करने में उपयोगी साबित हो सकते हैं। इससे जहरीली गैसों के रिसाव का समय रहते पता लगाकर बड़े हादसों को टालने में मदद मिलेगी।
शोध में पहले यह सुनिश्चित किया गया कि इस्तेमाल किया गया पदार्थ स्थिर है और लंबे समय तक कार्य करने के लिए उपयुक्त है। इसके बाद अलग-अलग जहरीली गैसों के संपर्क में आने पर उसके विद्युत व्यवहार का विश्लेषण किया गया। परिणामों से पता चला कि यह पदार्थ गैसों की मौजूदगी का सटीक संकेत देने की क्षमता रखता है।
ईसीई विभाग के शोधकर्ताओं की यह उपलब्धि विश्वविद्यालय की शोध संस्कृति और नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है। जहरीली गैसों की सटीक पहचान करने वाली तकनीक औद्योगिक सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जनस्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी। विश्वविद्यालय समाजोपयोगी शोध को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को विश्वस्तरीय अनुसंधान के लिए निरंतर बेहतर अवसर उपलब्ध करा रहा है: प्रो अनुपमा कौशिक शर्मा, कुलपति, एमएमएमयूटी