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डेल्टा प्लस वैरिएंट: आईसीएमआर और आरएमआरसी मिलकर करेंगे शोध, इस खास वजह से चिंतित हैं विशेषज्ञ

Wed, 30 Jun 2021 01:08 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।

सार

डेल्टा प्लस वैरिएंट पर टीका होगा प्रभावी या नहीं इसकी मिलेगी जानकारी। 
 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
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विस्तार
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इंडियन मेडिकल रिसर्च सेंटर (आईसीएमआर) की देखरेख में रिजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर (आरएमआरसी) के विशेषज्ञ कोरोना के नए वैरिएंट डेल्टा प्लस को बेअसर करने और मौजूदा वैक्सीन का इस वैरिएंट पर प्रभाव जानने के लिए शोध करेंगे। इस वैरिएंट की जानकारी के लिए आरएमआरसी ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वॉयरोलॉजी, पुणे (एनआईबी) को नमूने भी भेजे हैं।
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जानकारी के मुताबिक देश के चार राज्यों महाराष्ट्र, केरल, मध्य प्रदेश और तमिलनाडु में डेल्टा प्लस वैरिएंट के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। साथ ही इस वैरिएंट से मरीजों की मौत भी हो रही है। विशेषज्ञ अब तक का इसे सबसे खतरनाक वैरिएंट भी मान रहे हैं। इसकी वजह से सरकार और विशेषज्ञ भी चिंतित हैं। इस पर आईसीएमआर ने शोध का फैसला लिया है। 

आईसीएमआर के प्लानिंग कोर्डिनेटर और आरएमआरसी के निदेशक डॉ रजनीकांत ने बताया कि इस वैरिएंट पर शोध किया जाएगा। बताया कि आरएमआरसी ने जीनोम सीक्वेसिंग की जांच के लिए एनआईवी पुणे सैंपल भेज चुका है। अब तक रिपोर्ट नहीं आई है। रिपोर्ट आने के बाद शोध शुरू किए जाएंगे।
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दोनों वैक्सीन होगी शामिल

डॉ रजनीकांत ने बताया कि शोध में दोनों वैक्सीन, कोवाक्सिन और कोविशील्ड को शामिल किए जाएगा। बताया कि नया डेल्टा प्लस वैरिएंट में बढ़ी हुई संक्रमण क्षमता, फेफड़ों की कोशिकाओं के लिए उच्च क्षमता और मोनोक्लोनल एंटीबॉडी के लिए सही नहीं है। इसकी वजह से यह चिंता का विषय बना हुआ है।
 
डेल्टा वैरिएंट पर असरदार है टीका
आरएमआरसी के सीनियर वैज्ञानिक डॉ अशोक पांडेय ने बताया कि डेल्टा वैरिएंट पर टीका असरदार है। यह बात सामने आ चुकी है। प्रदेश के कई जिलों में दूसरी लहर में डेल्टा वैरिएंट ने तबाही भी मचाई है। जीनोम सीक्वेसिंग में यह बात सामने आ चुकी है। 
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