बीड़ी पीना स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। इसका सेवन करने वालों में कैंसर का खतरा तीन गुना तक बढ़ जाता है। यह बात एम्स गोरखपुर के नेतृत्व में किए गए एक बड़े शोध अध्ययन में सामने आई है। इस अध्ययन के निष्कर्ष अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा शोध पत्रिका द लैंसेट रीजनल हेल्थ दक्षिण-पूर्व एशिया में प्रकाशित हुए हैं।
सामुदायिक एवं परिवार चिकित्सा विभाग के डॉ. यू वेंकटेश के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन में देश के सात राज्यों के आठ प्रमुख चिकित्सा संस्थानों ने हिस्सा लिया। शोध में 2037 कैंसर मरीजों और 2066 स्वस्थ व्यक्तियों से जानकारी जुटाकर तुलना की गई।
शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों से उनकी सामाजिक स्थिति, जीवनशैली, तंबाकू सेवन की आदतों, बीड़ी पीने की अवधि और प्रतिदिन पी जाने वाली बीड़ियों की संख्या के बारे में विस्तृत जानकारी ली। इसके बाद अस्पताल अभिलेखों के आधार पर कैंसर से संबंधित जानकारियों का सत्यापन किया गया।
सभी आंकड़ों का संकलन और विश्लेषण एम्स गोरखपुर में किया गया। अध्ययन में पाया गया कि केवल बीड़ी पीने वाले लोगों में कैंसर होने की आशंका सामान्य लोगों की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक थी। वहीं, बीड़ी के साथ चबाने वाले तंबाकू का भी सेवन करने वालों में यह खतरा करीब चार गुना बढ़ा मिला।
एक से अधिक प्रकार के तंबाकू उत्पादों का उपयोग करने वालों में कैंसर का जोखिम चार गुना से भी अधिक पाया गया। शोध में यह भी सामने आया कि जितने अधिक वर्षों तक बीड़ी पी गई और जितनी अधिक संख्या में प्रतिदिन बीड़ी का सेवन किया गया, कैंसर का खतरा उतना ही बढ़ता गया।
एम्स की कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता ने कहा कि यह शोध संस्थान की बढ़ती अनुसंधान क्षमता का प्रमाण है। यह अध्ययन कैंसर की रोकथाम और तंबाकू नियंत्रण संबंधी नीतियों को मजबूत करने में मददगार साबित होगा। अध्ययन में रेडियोथेरेपी विभाग के डॉ. शशांक शेखर, आईसीएमआर के डॉ. हरिशंकर जोशी का भी योगदान रहा।