नरेंद्र सहित उनके परिवार के अन्य भू स्वामियों के लिए नो ड्यूज प्रमाणपत्र की आवश्यकता थी। इसका आवेदन लोगों ने किया तो माल बाबू नितिन श्रीवास्तव ने पत्रावली देने के लिए रुपये मांगे थे। नरेंद्र का कहना है कि नो ड्यूज देने के लिए प्रति किसान चार सौ रुपये की दर तहसील में तय की गई है। इसलिए उनसे पांच हजार रुपये देने को कहा गया था।
उधर, एचएसओ कैंट रणधीर मिश्रा ने बताया कि आरोपी के खिलाफ केस दर्ज हुआ था। मंगलवार को आरोपी को कोर्ट में पेश कर जेल भिजवाया गया।
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बिना चढ़ावा नहीं होता कोई काम
भूमि अधिग्रहण में किसानों का मुआवजा देने की प्रक्रिया कुछ कर्मचारियों के लिए कमाई का जरिया बन गई है। किसानों से वसूली किए बिना उनका कोई काम नहीं हो रहा है। नरेंद्र की मानें तो हर किसान से हर स्तर पर कुछ न कुछ रकम ली जा रही है। तहसील में नामांतरण, दाखिल खारिज, प्रमाण पत्र बनाने, खतौनी लेने सहित अन्य कामों में जमकर वसूली की जाती है। इसमें निजी कर्मचारियों और बिचौलियों की मदद ली जाती है।