ओवरलोड ट्रकों से वसूली प्रकरण में फंसे आरटीओ अफसरों की संपत्तियों की गोपनीय जांच शुरू हो गई है। खबर है कि कई ने रिश्तेदारों के नाम भी संपत्तियां खरीदी हैं। जांच एजेंसियां इनके दस्तावेजों को खंगाल रहीं हैं। उधर, पुलिस और एसटीएफ अलग से मामले की छानबीन में जुटी है।
बताया जा रहा है कि आरटीओ अफसरों ने जिन प्राइवेट लोगों और कर्मचारियों की मदद से वसूली कराई है, उनके मोबाइल की कॉल डिटेल भी खंगाली जा रही है। पुलिस विभाग के एक वरिष्ठ अफसर ने इसकी पुष्टि की है।
जानकारी के मुताबिक एसटीएफ ने पूर्वांचल के 18 जिलों में ओवरलोड ट्रकों को पार कराने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस भंडाफोड़ के बाद दर्ज कराए गए केस में आरटीओ, एआरटीओ समेत कई लोगों के नाम उजागर हो गए हैं।
अब वसूली में इनके भूमिका की जांच पुलिस कर रही है तो संपत्तियों का ब्योरा अन्य जांच एजेंसियों जुटा रही हैं। रिश्तेदार, दोस्त, कर्मचारी के नाम पर खरीदी गई संपत्तियाें का ब्योरा जुटाने में जुटी एजेंसियों के हाथ कुछ अफसरों के दस्तावेज भी लग चुके हैं।
उसका भौतिक सत्यापन होने के बाद जांच एजेंसियां शासन को अलग-अलग रिपोर्ट सौंपेंगी जिसके बाद ही कार्रवाई की गाज गिरनी है। एसटीएफ, पुलिस टीम की जांच में भूमिका तय होने के बाद गिरफ्तारी भी संभव हैं।
उधर, आरटीओ में केस दर्ज होने के बाद से ही हड़कंप मचा हुआ है। अफसर खुद को निर्दोष बताकर प्रकरण की जानकारी होने से ही इंकार कर रहे हैं तो उनके चेहरे की बेचैनी साफ देखी जा सकती है।
यह है मामला
एसटीएफ ने जांच के बाद 24 जनवरी को मधुबन होटल के मालिक धर्मपाल सिंह समेत छह लोगों को गिरफ्तार कर ओवरलोड ट्रकों से वसूली का भंडाफोड़ किया था। इस मामले में पुलिस ने आरोपितों के पास से डायरी बरामद की थी, जिसमें कई आरटीओ, एआरटीओ, सिपाहियों के नाम सामने आए। बेलीपार थाने में एफआईआर दर्ज की गई और आरोपितों को कोर्ट में पेश कर जेल भेजा गया था।