गोरखपुर। कथा व्यास आचार्य धीरज कृष्ण ने राम के जीवन प्रसंगों के माध्यम से परिवार, समाज और संस्कारों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान राम का जीवन मनुष्य को यह सिखाता है कि परिस्थितियां कैसी भी हों, सत्य, धर्म और मर्यादा का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए।
कथा व्यास आचार्य धीरज कृष्ण रविवार को तारामंडल स्थित निजी निजी रिसॉर्ट में राम कथा के शुभारंभ के बाद पहले दिन की कथा श्रद्धालुओं को सुना रहे थे। उन्होंने कहा कि भगवान राम ने पिता के वचन की रक्षा के लिए राजपाट का त्याग कर वनवास स्वीकार किया। उनके जीवन में त्याग केवल व्यक्तिगत तपस्या नहीं था, बल्कि परिवार और समाज के प्रति कर्तव्य का आदर्श था। राम ने माता-पिता के सम्मान, भाइयों के प्रेम और प्रजा के प्रति दायित्व को सर्वोच्च स्थान दिया। यही कारण है कि हजारों वर्षों बाद भी उनका चरित्र समाज के लिए प्रेरणा बना हुआ है।
आचार्य धीरज कृष्ण ने कहा कि आज परिवारों में बढ़ती दूरी और आपसी मतभेद का समाधान रामायण के आदर्शों में छिपा है। परिवार में यदि एक-दूसरे के प्रति सम्मान, प्रेम, त्याग और विश्वास हो तो घर में सुख-शांति बनी रहती है। रामकथा का उद्देश्य केवल कथा सुनना नहीं, बल्कि उसके संदेश को अपने आचरण में उतारना है। उन्होंने कहा कि राम का चरित्र हमें सिखाता है कि अधिकार से पहले कर्तव्य और सुख से पहले त्याग को महत्व देना चाहिए। राम के जीवन में धर्म, मर्यादा और करुणा का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। उनके आदर्शों को अपनाकर व्यक्ति अपने परिवार के साथ-साथ समाज को भी बेहतर दिशा दे सकता है। कथा के विश्राम पर आरती किया गया। कथा संयोजक आचार्य विजय कौशल, आचार्य अविनाश मिश्र और गोविंद श्रीवास्तव ने बताया कि कथा प्रतिदिन शाम छह से रात नौ बजे तक होगी। 14 सितंबर को पूर्णाहुति के अवसर पर भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
इस अवसर पर आचार्य अविनाश मिश्र, सामाजिक कार्यकर्ता मनजीत श्रीवास्तव बाबू, अविनाश श्रीवास्तव, राजेश सिंह, जगन्नाथ श्रीवास्तव, सुधीर सिंह, चंदन श्रीवास्तव, शुभम त्रिपाठी, श्रीकृष्ण श्रीवास्तव, रामनयन यादव, विश्वदीपक श्रीवास्तव, प्रशांत श्रीवास्तव, निखिल त्रिपाठी, सतीश शुक्ला सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
भगवान राम के जयकारों से गूंजा तारामंडल, निकली भव्य कलश यात्रा
राम कथा के शुभारंभ से पहले पंचमुखी हनुमान मंदिर से भव्य कलश यात्रा निकाली गई। हजारों महिला-पुरुष श्रद्धालु यात्रा में शामिल हुए। महिलाएं सिर पर कलश धारण कर मंगलगीत गाते हुए चल रही थीं। कथाव्यास आचार्य धीरज कृष्ण रथ पर विराजमान रहे। यात्रा तारामंडल और रुस्तमपुर के प्रमुख मार्गों से होते हुए तारामंडल के रिसॉर्ट पहुंची। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। विभिन्न समितियों की ओर से महिलाओं को चुनरी ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। कथा स्थल पर दीप प्रज्ज्वलन और रामायण की आरती के बाद कथा का शुभारंभ हुआ।