- बर्डघाट में आयोजित रामलीला के दूसरे दिन राम जन्म और ताड़का वध तक का मंचन
गोरखपुर। बर्डघाट रामलीला के दूसरे दिन बृहस्पतिवार को भगवान राम के चतुर्भुजी रूप में प्रकट होने का दृश्य आकर्षण का केंद्र रहा। माता कौशल्या के भवन में प्रभु के अवतार लेते ही रामलीला मैदान जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा। राम जन्म की लीला ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
रामलीला की शुरुआत रावण के बढ़ते अत्याचार से त्रस्त पृथ्वी के गौ रूप धारण कर देवराज इंद्र के पास पहुंचने से हुई। वहां उसे पता चला कि इंद्र समेत 33 करोड़ देवी-देवता रावण के बंदीगृह में हैं। इसके बाद पृथ्वी और देवी-देवता अपनी व्यथा लेकर पितामह ब्रह्मा और भगवान शिव के पास पहुंचे। भगवान शिव के प्रभु स्मरण के बाद आकाशवाणी हुई कि सूर्यवंशी राजा दशरथ के घर प्रभु अपने अंशों सहित अवतार लेकर पृथ्वी का भार हरेंगे।
कौशल्या को दिए चतुर्भुजी रूप में दर्शन
आकाशवाणी के बाद माता कौशल्या के भवन में भगवान राम का जन्म हुआ। प्रभु ने सबसे पहले चतुर्भुजी रूप में माता को दर्शन दिए। कौशल्या के आग्रह पर उन्होंने बाल रूप धारण किया। यह दृश्य सामने आते ही श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए।
कृष्ण आदर्श अवध मिथिला संयुक्त लीला मंडल की ओर से पृथ्वी पुकार, राम जन्म और तारका वध की लीलाओं का मंचन किया गया। इनमें राम जन्म प्रसंग ने दर्शकों पर विशेष प्रभाव छोड़ा। कार्यक्रम में समिति अध्यक्ष गणेश वर्मा, महामंत्री हरिद्वारा वर्मा, कोषाध्यक्ष मनोज वर्मा, रवि दाना वाले, अनिल बरनवाल, कृष्णकांत वर्मा, भरत जालान, अनुराम मझवार, अमरनाथ और राजेंद्र प्रसाद समेत समिति के पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे।