पूरामुफ्ती थाने में दर्ज हुई थी ठगी की रिपोर्ट, पकड़े गए बिहार के दीपक ने अनिल को बताया था सरगना
प्रवर्तन निदेशालय कर रहा मामले की जांच
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपु। रेलवे में फर्जी भर्ती के तार बिहार के साथ अलग-अलग राज्यों से भी जुड़े हैं। मामले में ईडी की टीम ने दो दिन पहले गोरखपुर के बांसगांव थाना क्षेत्र के फुलहर खुर्द के राघवेंद्र शुक्ला उर्फ मनीष उर्फ अनिल पांडेय के घर छापा मारा था। अनिल का नाम पहली बार प्रयागराज में दर्ज नौकरी दिलाने के नाम पर नौ लाख की ठगी के मामले में सामने आया। तब पकड़े गए बिहार के दीपक ने अनिल को इस गिरोह का सरगना बताया था। इसके बाद से अनिल ईडी के रडार पर आ गया।
ईडी के सूत्रों ने बताया कि कौशांबी के एक युवक ने मामले चार आरोपियों पर प्रयागराज के पूरामुफ्ती थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें प्रयागराज के पूरामुफ्ती थाना क्षेत्र के पूरामुफ्ती गेट (भारत हाॅस्पिटल के पास) के निवासी संदीप कुमार पटेल, नैनी प्रयागराज के उसी थाना क्षेत्र के एडीए काॅलोनी निवासी अंकित मिश्रा, पूर्वी चंपारण के डुमरियाघाट थाने के सेमुआपुर, हुस्सैनी गांव निवासी दीपक तिवारी और गोरखपुर के बांसगांव थाना क्षेत्र के फुलहर खुर्द निवासी राघवेंद्र शुक्ला उर्फ मनीष उर्फ अनिल पांडेय को आरोपी बनाया गया था।
ऐसे ही एक दूसरे मामले में तीन दिसंबर 2024 को सोनपुर बिहार में सोनपुर जीआरपी ने दीपक तिवारी और सक्षम श्रीवास्तव को आरोपी बनाते हुए उनकी गिरफ्तारी की थी। अब फर्जी नियुक्ति के नाम पर 100 करोड़ रुपये से अधिक की रकम खाते में जमा होने की सूचना पर ईडी मनी लॉंड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच कर रही है।
रेलवे में फर्जी नियुक्ति कराने वाला रैकेट
रेलवे की तरफ से समय-समय पर ग्रुप डी में अलग-अलग पदों पर भर्ती निकाली जाती है। ईडी के विश्वसनीय सूत्रों ने बताया कि रेलवे के अलावा अन्य सरकारी विभागों में फर्जी नियुक्ति के नाम पर पूरा रैकेट संचालित है। ये गिरोह भारतीय रेलवे में आरपीएफ, टीटीई, तकनीशियन आदि सरकारी पदों के इच्छुक उम्मीदवारों को निशाना बनाकर फर्जी नौकरी देने का रैकेट चलाता था। वे फर्जी जॉइनिंग लेटर बनाते थे। फर्जी प्रशिक्षण केंद्र चलाते थे और साथ ही फर्जी पहचान पत्र और ईमेल आईडी भी बनाते थे जो असली सरकारी ईमेल आईडी जैसी नजर आती थी।
फर्म बनाकर आवेदकों से मंगाते थे रुपये
फर्म बनाकर आरोपी, इच्छुक दावेदारों से रुपयों की डिमांड कर उसे अपने खातों में जमा करवाते थे। ये खाते उनके फर्जी जीएसटी पर संचालित फर्मों के होते थे। सूत्र ने बताया कि नौकरी को वैध दिखाने के लिए उम्मीदवारों को 2-3 महीने तक अपने निजी फर्मों से सरकारी बैंक खातों जैसे ''''''''मेसर्स ट्रेजरी ऑफिस आरओ'''''''', ''''''''मेसर्स एफसीआई आरओ'''''''', ''''''''आरआरबी'''''''', ''''''''बाय सैलरी'''''''' आदि से वेतन का भुगतान भी करते थे। वेतन आने के बाद उम्मीदवारों को भी लगता थी कि उनकी जॉइनिंग हो गई है। इसके बाद उनसे इनका संपर्क भी धीरे-धीरे खत्म हो जाता था।
गोरखपुर से पहले भी हो चुकी है गिरफ्तारी
रेलवे में फर्जी नियुक्ति के नाम पर सोनपुर जीआरपी थाने में अपराध संख्या 158/2024 की प्राथमिकी दर्ज है। जांच के क्रम में इसमें गोरखपुर के दो युवकों का नाम सामने आया था। बिहार पुलिस ने मामले में इन दोनों की गिरफ्तारी भी कुशीनगर और गोरखपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र से की थी। पूछताछ में उन्होंने हाजीपुर जेल में बंद अभियुक्त दीपक तिवारी का नाम बताया था। ईडी सूत्रों ने बताया कि जेल में बंद दीपक से पूछताछ हुई तो उसने पूरे मामले का सरगना अनिल पांडेय उर्फ राघवेन्द्र शुक्ला को बताया था।
गुजरात की फर्म के जरिये लेन-देन
ईडी सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों से पूछताछ में पता चला कि नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं से पैसा लेकर सीधे गुजरात के राजकोट के एक खाते में जमा करवा दिया जाता था। यह खाताधारक और मनीष उर्फ अनिल पांडेय की साझेदारी में संचालित होता था।