डीएलए ने बताया कि सभी दुकानें नारकोटिक्स की दवाओं का बड़े स्तर पर काम करती है। इनके संचालकों से खरीद और बिक्री के तीन साल के रिकॉर्ड मांगे गए हैं। बताया कि इन दुकानों से नारकोटिक्स की पाइवोनस्पास, जीरोडॉल टी, कफ सिरप कोरेक्स-टी, अल्प्राजोलॉम, कफ सिरप कोडिंटस, रेडीप्राजोल डीएसआर, अल्ट्रासीट, ट्रामाडोल समेत नौ दवाओं के नमूने लिए गए हैं।
करोड़ों की दवाएं बिना बिल वाउचर के मंगाई गईं
भालोटिया मार्केट नशीली दवाओं का केंद्र बनता जा रहा है। इसकी वजह यह है कि करोड़ों रुपये की नशीली दवाएं अवैध रूप से मार्केट में आ रही हैं, जिसका हिसाब नहीं है। यह दवाएं बिना बिल वाउचर के मंगाई जा रही है। इसका खुलासा भी 14 दिन पहले हो चुका है। ब्लीचिंग पाउडर के नाम पर दो करोड़ की नशीली दवाएं पकड़ी गई थीं। उसी दौरान विभाग को यह भी सूचना मिली थी कि नारकोटिक्स की काफी दवाएं भालोटिया मार्केट में हैं, जिसे विभाग की लापरवाही के कारण व्यापारियों ने हटा दिया।
मैनेज करने के खेल में आगरा से आए एक दवा व्यापारी
बताया जाता है कि आगरा में दवा विक्रेताओं का दो दिवसीय सम्मेलन चल रहा है। एक दवा व्यापारियों के समूह के पदाधिकारी कुछ व्यापारियों के साथ सम्मेलन में शामिल होने गए हुए थे। एक बिचौलिए के जरिये व्यापारी नेता ड्रग विभाग से कांफ्रेंस कॉल के जरिये वार्ता की। मामला तय भी हो गया, लेकिन अधिकारी ने उस व्यापारी के साथ बैठकर मामले को मैनेज करने के लिए बुलाया।
इस पर रविवार रात ही व्यापारी आगरा से गोरखपुर के लिए चल दिया। लेकिन, इस बीच मामला मीडिया के बीच पहुंच गया। इस पर अधिकारी और व्यापारी मैनेज नहीं कर सके। उस पर प्रशासन का दबाव भी विभाग पर पड़ गया। यही कारण है कि विभाग यह छापा मारकर संदेश दिया है कि मैनेज करने के आरोप निराधार हैं।
सहायक औषधि आयुक्त एजाज अहमद ने कहा कि दवाओं के मामले में लगातार कार्रवाई की जा रही है। अब तक पांच दुकानों पर छापा मारकर 13 नारकोटिक्स दवाओं के नमूने लिए गए हैं। साथ ही गुप्ता भाइयों के दुकान और गोदाम भी सील कर दिए गए हैं। मैनेज करने के आरोप पूरी तरह से निराधार हैं।