विभिन्न संस्थाओं से जुड़े थे राधेश्याम खेमका
राधेश्याम खेमका ने 40 वर्षों से गीता प्रेस में अपनी भूमिका का निर्वहन करते हुए अनेक धार्मिक पत्रिकाओं का संपादन किया। इनमें कल्याण प्रमुख है। साथ ही वह वाराणसी की प्रसिद्ध संस्थाओं मारवाड़ी सेवा संघ, मुमुक्षु भवन, श्रीराम लक्ष्मी मारवाड़ी अस्पताल गोदौलिया, बिड़ला अस्पताल मछोदरी, काशी गोशाला ट्रस्ट सहित विभिन्न समाजसेवी संस्थाओं से जुड़े थे।
साधु-संतों का रहा सानिध्य
धर्म सम्राट स्वामी करपात्रीजी, शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती, पुरी के शंकराचार्य स्वामी निरंजन देव तीर्थ और वर्तमान पीठाधीश्वर स्वामी निश्चलानंद, कथा व्यास रामचंद्र डोंगरे जैसे संतों से विशेष सानिध्य स्व. राधेश्याम खेमका पर रहा।
इन विशेषांक का किया संपादन
श्रीवामन पुराण अंक, चरितनिर्माण अंक, श्रीमत्स्य पुराण अंक (पूर्वार्ध), श्रीमत्स्य पुराण अंक (उत्रार्ध), संकीर्तन अंक, शक्ति उपासना अंक, शिक्षा अंक, पुराणकथा अंक, देवता अंक, योगतत्वांक, संक्षिप्त भविष्य पुराण अंक, श्रीराम भक्ति अंक, गो सेवा अंक, धर्मशास्त्र अंक, कूर्मपुराण अंक, भगलल्लीला अंक, वेद कथा अंक, संक्षिप्त गरुड़ पुराण अंक, आरोग्य अंक, नितिसार अंक, भगवत प्रेम अंक, व्रतपर्वोत्सव अंक, देवीपुराण (शक्तिपीठांक), अवतार कथा अंक, संस्कार अंक, श्रीमद्देवी भागवत अंक (पूर्वार्ध), श्रीमद्देवी भागवत अंक (उत्रार्ध), जीवनचर्या अंक, दानमहिमा अंक, श्रीलिंग महापुराण अंक, भक्तमाल अंक, ज्योतितत्वांक, सेवा अंक, गङ्गा अंक, शिव महापुराण अंक (पूर्वार्ध), शिव महापुराण (उत्रार्ध), श्रीराधा माधव अंक, बोधकथा अंक, श्री गणेश पुराण अंक।
संपूर्ण जीवन किया गंगाजल का सेवन
गीता प्रेस के प्रबंधक लालमणि तिवारी ने बताया कि अपने संपूर्ण जीवन में राधेश्याम खेमका ने सिर्फ गंगा जल का ही सेवन किया। अन्न केवल दो बार ग्रहण करते थे। सादा जीवन उच्च विचार उनके आचरण में था। 60 से अधिक वर्षों तक उन्होंने इलाहाबाद के माघ मेला में एक महीने का कल्पवास किया था। उनका जीवन बहुत ही संयमित था। साधु-संतों और गरीबों की सेवा करना उनके स्वभाव में था। अपने कार्यों के दम पर वह पद्म विभूषण के अधिकारी थे। भारत सरकार ने भी एक ऐसे व्यक्ति को पद्म विभूषण सम्मान से नवाजा है, जिनके लिए कभी न प्रयास किया गया और न ही इनके मन में कभी इच्छा रही।