गांव में पन्नेलाल की चाय की दुकान पर बैठे सुनील ने कहा- ऐसे दरिंदे की वजह से बेटियां अपने घर में भी सुरक्षित नहीं है। अगर बच्ची, मां के पास सुरक्षित नहीं है तो फिर स्कूल, घर के बाहर खेलते वक्त कैसे हो सकती है। ऐसे आरोपी का एनकाउंटर कर देना चाहिए था।
खैर अब तो वह जेल में है, लेकिन उसे फांसी पर लटका देना चाहिए। बीच में राकेश साहनी बोल पड़े- जैसे दिल्ली में निर्भया कांड के आरोपियों के साथ हुआ था, वैसे ही इस दरिंदे के साथ होना चाहिए। अगर यह छूटा तो फिर इसी तरह की हरकत करेगा। इससे गांव को बचाना है तो इसे सजा दिलाना ही होगा।
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तभी कैलाश यादव और गोरख बोले-अरे भाई ! काहे भूल जा रहे हो, यह वही तो है, जिसने अपनी घर की बेटी तक को नहीं छोड़ा था। उसके साथ भी ऐसी ही हैवानियत की थी, बड़ी मुश्किल से उसकी जान बच सकी थी। सभी आरोपी पर चर्चा कर ही रहे है कि शंभू निषाद भी आ जाते हैं।
उन्होंने कहा- बच्ची को भगवान शांति दे, लेकिन हम लोगों की भी जिम्मेदारी है कि आरोपी को सजा मिल सके। हम सबको आगे आने होगा। जहां जरूरत हो, वहां पर पुलिस के सहयोग की जरूरत है। विजय निषाद ने कहा कि इसे ऐसी सजा देनी चाहिए कि सबके लिए नजीर बने। इसे फांसी पर लटका देना चाहिए।
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तीन साल की मासूम से हैवानियत करने के आरोपी मिथिलेश विश्वकर्मा के पकड़े जाने के बाद से उसका पिता धुरई गांव से फरार हो गया है। उसने ही बेटे की जमानत करवाई थी। गांव के लोग आरोपी के पिता से भी खफा हैं। उनका कहना है कि अगर उसने जमानत नहीं कराई होती तो आरोपी जेल से बाहर नहीं आता। तब शायद इतनी बड़ी घटना भी नहीं होती।