संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। शासन द्वारा 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के दो पहिया और चार पहिया वाहन चलाते हुए पाए जाने पर अभिभावक-संरक्षक पर तीन साल की सजा और 25 हजार का जुर्माना लगाया गया है। इसे लेकर शहर के लोगों की अलग-अलग राय है। सड़क दुर्घटना के लिहाज से कुछ लोग इसे सही मान रहे हैं। वहीं कुछ का कहना है कि आजकल के बच्चे जल्दी ही चीजें सीख लेते हैं। वे 16 साल की उम्र में परिपक्व हो जा रहे, उन्हें इस तरह रोकना सही नहीं है। बड़े बच्चों के स्कूल दूर होते हैं। साथ ही उन्हें कोचिंग और घर के छोटे-मोटे काम भी करने पड़ते हैं। ऐसे में दो पहिया वाहन पर छूट देनी चाहिए या ऐसे विकल्प विकसित करने चाहिए जो इस समस्या का समाधान कर सके।
कोट..
16 साल की उम्र में बच्चों में मैच्योरिटी आ जाती है। बच्चे जल्दी-जल्दी सीखते हैं। ऐसे में उन्हें दो पहिया वाहन चलाने की छूट होनी चाहिए। यह बात अलग है कि उन्हें मोटरसाइकिल देने के साथ नियम कानून अच्छे से बताना चाहिए।
खुशबू मोदी, बलदेव प्लाजा
बच्चों के लिए यह कानून सही है। उनमें मोटापा बढ़ता जा रहा है। अगर वह साइकिल से आते-जाते है तो इससे उनका एक्साइज भी हो जाएगा और स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा। मेरा बेटा 11वीं में पढ़ता है उसे मोटरबाइक नहीं चलाने देती हूं।
गरिमा अग्रवाल, दीवान बाजार
सुरक्षा के लिहाज से यह कानून ठीक है। बच्चों में उत्साह के साथ काम करने की जल्दी होती हैं। वह तेज स्पीड में वाहन चलाते हैं, जिस कारण कभी-कभी दुर्घटना हो जाती है।
साकेत गुप्ता, जगन्नाथपुर
कानून तो सही है, लेकिन बच्चों के लिए साइकिल के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। ऐसे में बच्चों को दूर स्कूल जाने में परेशानी होगी। सरकार को कुछ छूट देनी चाहिए।
मंटू चतुर्वेदी, नौसड़