गोरखपुर। नगर निगम के उपसभापति पद का चुनाव अब सावन माह में कराया जाएगा। पांच अगस्त से पहले निर्वाचन की पूरी प्रक्रिया संपन्न कराए जाने की तैयारी है। चुनाव की तिथि नजदीक आते ही निगम सदन में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। भाजपा के भीतर उपसभापति पद को लेकर मंथन जारी है। 36 वर्षों में पहली बार किसी दलित पार्षद को इस पद की जिम्मेदारी देने की संभावना पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा सामाजिक संतुलन और दलित प्रतिनिधित्व का संदेश देने की रणनीति पर काम कर रही है। हालांकि पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग की महिला पार्षद भी मजबूत दावेदार मानी जा रही हैं। दोनों के पक्ष में भी कई पार्षदों का समर्थन बताया जा रहा है।
वहीं, दलित पार्षद एकजुट होकर संगठन और पार्टी नेतृत्व से उपसभापति पद पर दलित प्रतिनिधि को अवसर देने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि अब तक इस पद के लिए 19 चुनाव हो चुके हैं लेकिन किसी भी दलित पार्षद को उपसभापति बनने का अवसर नहीं मिला। हालांकि अंतिम निर्णय भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की सहमति के बाद ही लिया जाएगा।
हाल ही में हुए नगर निगम कार्यकारिणी चुनाव में भी भाजपा ने नए चेहरों को प्राथमिकता देते हुए सामाजिक संतुलन साधने का प्रयास किया था। कार्यकारिणी में दो ओबीसी, दो दलित और एक सामान्य वर्ग के पार्षद को स्थान देकर पार्टी ने स्पष्ट संकेत दिए थे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उपसभापति चुनाव में भी पार्टी इसी सामाजिक समीकरण को आगे बढ़ा सकती है। संख्या बल के लिहाज से समाजवादी पार्टी की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर मानी जा रही है। ऐसे में उपसभापति का चुनाव विपक्ष की बजाए भाजपा के आंतरिक समीकरणों और संगठन के अंतिम निर्णय पर ही निर्भर माना जा रहा है।