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पड़ताल: कैसे लड़ेंगे कोरोना से जंग, कहीं कर्मचारी तो कहीं बिजली के अभाव में ऑक्सीजन प्लांट ठप

Tue, 11 Apr 2023 05:57 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।

सार

कोरोना नोडल अधिकारी डॉ. एके चौधरी ने कहा कि मॉकड्रिल को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं, जो कमियां है उसे दुरुस्त कर लिया जाएगा। जहां-जहां ऑक्सीजन प्लांट लगे हैं, उसकी जांच की जाएगी। सभी प्लांट को सही कराया जाएगा। जिन प्लांट पर बिजली की आपूर्ति नहीं है, वहां बिजली कनेक्शन लिया जाएगा।
 
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बीआरडी में एक साल से बंद प्लाट। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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कोरोना काल के बाद जिले के करीब 70 फीसदी अस्पतालों में लगाए गए ऑक्सीजन प्लांट वर्तमान में शोपीस बने हुए हैं। कहीं पर प्लांट को चलाने के लिए कर्मचारी नहीं हैं तो कहीं बिजली का कनेक्शन नहीं है। इन हालातों के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में सब कुछ ठीक चल रहा है।

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जिले में कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। इसे देखते हुए 11 और 12 अप्रैल को मॉकडि्रल होनी है। मॉकडि्रल से पहले ही व्यवस्थाएं दम तोड़ती नजर आ रही है। वहीं स्वास्थ्य विभाग कागजों में सब कुछ दुरुस्त करने में जुटा है। ऑक्सीजन प्लांट की स्थिति जानने के लिए कई बार मॉकडि्रल हो चुकी है। हर बार मॉकडि्रल में विभाग इन प्लांटों को कागजों में ठीक बताकर वाहवाही लूट रहा है। इन हालातों में कोरोना से जंग लड़ना मुश्किल हो सकता है।

प्लांट लगा पर शुरू नहीं हो पाया
चौरीचौरा सीएचसी पर 500 लीटर प्रति मिनट के हिसाब से ऑक्सीजन प्लांट लगाए गए थे। इस प्लांट से एक साथ 50 बेड पर मरीजों को ऑक्सीजन की सुविधा उपलब्ध होती। लेकिन, यह प्लांट लगने के बाद शुरू ही नहीं हुआ। इसकी सूचना कई बार विभाग को दी गई है, लेकिन इसकी मरम्मत नहीं कराई गई।
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खराब होने की स्थिति में ऑक्सीजन कंसंट्रेटर

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोराबार में छह बेड का कोविड वार्ड बनाया गया है। यहां पर प्लांट तो नहीं लगाए गए हैं, लेकिन ऑक्सीजन कंसंट्रेटर जरूर हैं। यह काम के हैं या नहीं। इसे बताने वाला कोई नहीं है। बताया जा रहा है कि कंसट्रेटर काफी दिनों से चला ही नहीं। ऐसे में यह खराब होने की स्थिति में पहुंच गया है। हालांकि विभाग का कहना है कि मरीजों के बढ़ने पर इलाज के पूरे इंतजाम हैं।

जब से लगा शुरू ही नहीं हुआ
बड़हलगंज क्षेत्र के खड़ेसरी में स्थित होम्योपैथी मेडिकल काॅलेज में 100 बेड का कोविड अस्पताल बनाया गया है। इसमें आक्सीजन सपोर्ट के 50 बेड हैं। ऑक्सीजन प्लांट यहां भी लगाए गए हैं। लेकिन, लगने के बाद एक बार भी इसे चालू नहीं किया गया। कई बार मॉकडि्रल हुई, लेकिन वह चला नहीं। बताया जा रहा है कि कर्मचारी की नियुक्ति नहीं होने के कारण यह नहीं चला।

चलाने के लिए नहीं मिले कर्मचारी
हरनही में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 30 बेड का कोविड अस्पताल बनाया गया है। इस केंद्र पर ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया है। बताया जा रहा है कि यहां पर स्थापित प्लांट चल रहा है। लेकिन, प्लांट को चलाने के लिए कर्मचारी की नियुक्ति नहीं की गई है। इसकी वजह से इसे चलाने में दिक्कत आ रही है।

 
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प्लांट में नहीं मिली बिजली की सप्लाई

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पिपरौली में 10 बेड का कोविड वार्ड बनाया गया है। ऑक्सीजन प्लांट भी लगाया गया। प्लांट लगने के बाद अस्थायी कनेक्शन से पहली बार इसे चेक किया गया। चेक करने के तत्काल बाद कनेक्शन काट दिया गया। कनेक्शन कटने के बाद उसे जोड़ा नहीं गया। पिछले एक साल से प्लांट बंद है।

बीआरडी में एक साल से बंद है प्लांट
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के बाल रोग संस्थान में एक हजार लीटर प्रति मिनट का ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया है। यह प्लांट क्रियाशील है। लेकिन, इसका इस्तेमाल पिछले एक साल से नहीं किया गया है। जबकि, इस प्लांट से एक हजार बेड पर सीधे ऑक्सीजन की आपूर्ति हो सकेगी।

दो दिन होगा मॉकड्रिल
कोरोना के बढ़ते खतरे को देखते हुए 11 और 12 को जिले में मॉकड्रिल होगा। मॉकड्रिल के लिए जिले में पांच अस्पताल चिन्हित हैं। इसमें 100 बेड टीबी अस्पताल के अलावा चौरीचौरा, हरनही, कैंपियरगंज, बड़हलगंज स्थित होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज इस सूची में शामिल है। शासन ने इस मॉकड्रिल की निगरानी के लिए संयुक्त निदेशक परिवार कल्याण डॉ. अमित सिंह को नोडल अधिकारी के रूप में तैनात किया है।

कोरोना नोडल अधिकारी डॉ. एके चौधरी ने कहा कि मॉकड्रिल को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं, जो कमियां है उसे दुरुस्त कर लिया जाएगा। जहां-जहां ऑक्सीजन प्लांट लगे हैं, उसकी जांच की जाएगी। सभी प्लांट को सही कराया जाएगा। जिन प्लांट पर बिजली की आपूर्ति नहीं है, वहां बिजली कनेक्शन लिया जाएगा।

 
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