त्रयोदशी और चतुर्दशी के योग से
खास है इस बार का प्रदोष व्रत
गोरखपुर। भगवान शिव और माता पार्वती के उपासना का पर्व प्रदोष व्रत इस माह 15 सितंबर को मनाया जाएगा। इस माह प्रदोष पर खास संयोग बन रहे हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार मंगलवार को पड़ने वाले प्रदोष को ‘भौम प्रदोष’ कहते हैं। इस बार मंगलवार को ही यानी त्रयोदशी के दिन से ही चतुर्दशी भी लग रही है, जो कि बहुत ही खास संयोग है। हर मास में चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि के रूप में मनाते हैं और व्रत रखकर शिवजी की पूजा की जाती है। त्रयोदशी के दिन ही चतुर्दशी का लग जाना धार्मिक दृष्टि से अहम माना जाता है। इसलिए इस बार के प्रदोष व्रत का महत्व और भी बढ़ जाता है।
भौम प्रदोष का महात्म्य
पंडित रमानाथ के अनुसार शिव भक्तों में भौम प्रदोष व्रत का काफी महत्व है। इस व्रत को करने से हजारों यज्ञों का फल प्राप्त होता है। यह मोक्ष प्राप्ति का साधन व दरिद्रता का नाश करने वाला है। संतान प्राप्ति के लिए भी इस व्रत का महत्व सर्वोपरि है।
ऐसे करें पूजन
पंडित अरविंद गिरि के अनुसार इस दिन व्रत करने वाले ब्रह्म मुहूर्त में उठें। स्नानादि से निवृत्त होकर भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा कर व्रत का संकल्प लें। दिनभर शिवमंत्रों का जाप करते हुए व्रत रखें। शाम को भोलेनाथ की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करें। पूजन में बेलपत्र, भांग, धतूरा, पुष्प, फल और मिष्ठान जरूर चढ़ाएं। इसके बाद भोग लगाएं और शिव मंत्र का जप करें।
मांगलिक लोग अवश्य रखें व्रत
पंडित राकेश पांडेय के मुताबिक जिनकी कुंडली में मंगल दोष हो उन्हें भौम प्रदोष व्रत करना चाहिए। मांगलिक लोगों को इस व्रत को करने से मंगल का अशुभ प्रभाव दूर होता है। अगर आप मूंगा (धातु) धारण करने का विचार कर रहे हैं तो आपके लिए यह दिन सबसे उपयुक्त है। इस दिन हनुमानजी के मंदिर में जाकर दीपक जलाएं और सिंदूर का चोला भी चढ़ा सकते हैं।