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BJP प्रदेश अध्यक्ष को हरा शाकिर अली ने मनवाया था लोहा, मंत्री पद नहीं मिलने पर सपा से हुए थे नाराज

Tue, 25 Feb 2020 09:38 AM IST
vivek shukla सुनील कुमार सिंह, देवरिया।
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बाएं पूर्व मंत्री शाकिर अली, दाएं जनाजे में उमड़ी भीड़। - फोटो : अमर उजाला।
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भाजपा के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही को 2012 के विधानसभा चुनाव में पथरदेवा से पटखनी देकर पूर्व मंत्री शाकिर अली ने अपनी राजनीतिक कुशलता का लोहा मनवाया। हालांकि अखिलेश यादव की सरकार में उन्हें मंत्री पद नहीं मिला था। इसका मलाल उन्हें रहा और मंचों से बेबाकी से इसके लिए उस सरकार के दो मंत्रियों को दोषी बताते थे।

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15 दिसंबर 1953 को करजहां के एक साधारण से परिवार में जन्मे शाकिर अली की प्रारंभिक शिक्षा गांव में हुई। अशोक इंटर कॉलेज बरपार में हाईस्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह वाराणसी के हरिश्चन्द्र इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की। वहीं बीएचयू  से स्नातक की उपाधि हासिल की। वर्ष 1989 में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी से राजनीति में कदम रखा और इसी साल गौरीबाजार विधानसभा क्षेत्र से पहला चुनाव लड़े और पराजय का सामना करना पड़ा। 1991 में बसपा के ही टिकट पर दूसरी बार किस्मत आजमाई, लेकिन इस बार भी नजीता पहले जैसा ही रहा।

1993 में बसपा और सपा के गठबंधन के प्रत्याशी के रूप में तीसरी बार में उन्हें जीत मिली और प्रदेश सरकार में शिक्षामंत्री बने। दो जून 1995 को बसपा छोड़कर सपा का दामन थाम लिए। 1996 में सपा से चुनाव मैदान में उतरे और हार गए। 2000 में हुए उप चुनाव में फिर उनकी किस्मत ने साथ नहीं दिया और बेहद नजदीकी मुकाबले में बसपा प्रत्याशी जन्मेजय सिंह से मात्र 29 मत से चुनाव हार गए।
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2002 के चुनाव में दूसरी बार उन्हें गौरीबाजार विधानसभा क्षेत्र की रहनुमाई का मौका मिला। 2004 में पार्टी की सरकार बनने पर लघु सिंचाई और मुस्लिम वफ्फ बोर्ड के कैबिनेट मंत्री बने। 2007 के चुनाव में उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा। 2009 में पडरौना विधानसभा क्षेत्र के उप चुनाव में भी बसपा प्रत्याशी स्वामी प्रसाद मौर्य से शिकस्त खानी पड़ी।

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महुआडीह में दुकानें बंद कर व्यापारियों ने जताया शोक

2012 में नवसृजित पथरदेवा विधानसभा से भाजपा के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही को हराकर विधायक बने। सपा की पूर्ण बहुमत की सरकार में उन्हें मंत्री पद नहीं मिला। पथरदेवा से विधायक बनने के बाद वह देवरिया सदर रेलवे स्टेशन पर आए तो प्लेटफार्म पर घोड़ा दौड़ा दिया था। यह मामला रेलवे कोर्ट में विचाराधीन है। वर्ष 2017 के चुनाव में सूर्य प्रताप शाही से उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

पूर्व कैबिनेट मंत्री शाकिर अली सरल व्यक्तित्व के धनी थे। वह गरीबों, पिछड़े और समाज के दबे-कुचले लोगों के लिए हमेशा खड़े रहे। उनके निधन से हर किसी को दुख हुआ है। निधन की खबर से क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। महुआडीह चौराहे के दुकानदारों ने शोक में अपनी दुकानें बंद रखीं।

क्षेत्र के लोगों का कहना है कि चुनाव में हार हो या जीत किसी को भी भाई कहकर मिलने से कभी परहेज नहीं किए। इस उम्र में अपने से काफी छोटे लोगों को भी नाम के साथ भाई जोड़कर ही बुलाते थे। सादगी से मिलना और मृदुभाषी स्वभाव की कमी लोगों के बीच खलती रहेगी। वह अपने राजनीतिक पारी की शुरुआत पिछड़े और समाज के दबे लोगों के हक और लड़ाई से की। बसपा और सपा में रहते हुए कई उतार और चढ़ाव का सामना किए, लेकिन मगर पिछड़े वर्गों की राजनीति से कभी कोई समझौता नहीं किया।

सयुस के निवर्तमान राष्ट्रीय महासचिव मनीष सिंह, प्रसपा के प्रदेश सचिव अमरेश सिंह पिंटू ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उधर भाकपा मार्क्सवादी की बैठक गोरखनाथ तिवारी की अध्यक्षता में कचहरी परिसर में हुई। इसमें पूर्व मंत्री शाकिर अली के निधन पर शोक व्यक्त किया गया। इसमें जयप्रकाश यादव, लालता प्रसाद यादव, उदयभान यादव, परमहंस भारती आदि ने शोक व्यक्त किया।

सपा कार्यकर्ताओं में शोक की लहर
सपा नेता और पूर्व मंत्री शाकिर अली के निधन की खबर से सपा कार्यकर्ताओं में शोक की लहर दौड़ गई। विधायक डॉ. आशुतोष उपाध्याय ने लखनऊ से दूरभाष पर शोक संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि उनके असमय निधन से पार्टी को क्षति हुई है। डॉ. अरविंद सहाय ने कहा कि पूर्व मंत्री के निधन से पार्टी को गहरा आघात लगा है। ब्लॉक प्रमुख व्यास यादव, जिला पंचायत सदस्य अशोक यादव, पूर्व जिला मंत्री अनूप कुमार यादव, रामबली यादव, सुनील यादव, मृत्युंजय सिंह, मंटू यादव, मनन राय, बीके तिवारी, राजू मिश्रा आदि ने शोक व्यक्त किया है।

गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, शामिल हुए कैबिनेट मंत्री
पूर्व मंत्री शाकिर अली का शव सोमवार की शाम गांव में ही सुपुर्दे खाक किया गया। कैबिनेट मंत्री सूर्य प्रताप शाही, डीएम अमित किशोर, प्रभारी एसपी शिष्यपाल की मौजूदगी में उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस दौरान पूर्व सांसद बालेश्वर यादव, पूर्व मंत्री राधेश्याम सिंह, पूर्व विधायक पीके राय, ओमप्रकाश गौतम, वेदव्यास सिंह, अभिमन्यु यादव, मुमताज अली समेत हजारों लोग शामिल रहे।
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