उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में बदमाशों पर शिकंजा कसने के लिए पुलिस ने बंद फाइलें खोल दी है। एक भी बदमाश बचने ना पाए, इसके लिए नए-पुराने सभी बदमाशों की वर्तमान गतिविधि का सत्यापन शुरू कर दिया गया है। साथ ही हिस्ट्रीशीटरों पर सख्ती भी बढ़ा दी गई है।
जांच में पाया गया कि जिले में करीब 207 हिस्ट्रीशीटर ऐसे हैं, जिनके बारे में लंबे समय से पुलिस को भी कोई जानकारी नहीं मिली है। पुलिस उनके नाम के आगे लापता लिखकर काम चला रही थी। एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने सख्ती की तो थानेदारों ने अपने स्तर पर ही पुलिस की टीमें गठित कर इनकी तलाश शुरू कर दी है।
जानकारी के मुताबिक, जिला पुलिस को दस साल पुराने रिकॉर्ड को ना सिर्फ दुरुस्त करना है, बल्कि उसका सत्यापन भी करना है। जिला पुलिस के रिकॉर्ड में 1447 हिस्ट्रीशीटर के नाम दर्ज हैं। नियमानुसार पुलिस को इन सभी का सत्यापन करना होता है कि कौन अपराध में सक्रिय है और कौन नहीं।
इतना ही नहीं, जो अपराध में सक्रिय नहीं हैं, वे अभी क्या कर रहे हैं, यह जानकारी भी पुलिस को जुटानी होती है। इसके बावजूद जिले में करीब 207 हिस्ट्रीशीटर ऐसे हैं, जिनके बारे में पुलिस को ही लंबे समय से जानकारी नहीं मिली है।
इन हिस्ट्रीशीटरों में से कई की मौत हो चुकी है, लेकिन इसकी औपचारिक पुष्टि नहीं है। तकनीकी रूप से पुलिस हिस्ट्रीशीट को खत्म भी नहीं कर सकती है। ऐसे में पुलिस इनके नाम के सामने लापता लिखकर मामले को दबा देती थी, लेकिन एसएसपी की सख्ती के बाद पुलिस सक्रिय हो गई है।
अब लापता हिस्ट्रीशीटरों का सत्यापन शुरू कराया गया है। जो फरार हैं, उन्हें जल्द ही दबोचा जाएगा। इसी तरह दस साल के पुलिस रिकॉर्ड को दुरुस्त किया जा रहा है। पुराने मुकदमों में जेल गए या वांछित रहे बदमाशों का सत्यापन करने का आदेश भी हुआ है।