केस एक
27 दिसंबर को गोरखनाथ इलाके की रहने वाली एक महिला थाने पहुंची थी। प्रार्थना पत्र देकर मांग की कि पति पर केस दर्ज किया जाए। वजह पूछी गई तो बताया कि उसे जब भी घरेलू सामान लाने को भेजती है तो वह दूसरे ब्रांड का लेकर आता है। शादी के बारे में बताया कि दो साल पहले लव मैरिज हुई थी। पुलिस ने दोनों पक्षों को बुलाकर समझौता कराया।
केस दो
गीडा इलाके के रहने वाले एक दंपती का निकाह करीब 9 साल पहले हुआ था। शुरुआत में सब कुछ ठीक चला, मगर इधर तीन साल से रिश्तों में इस कदर तल्खी आ गई थी कि दोनों ने रिश्ते को तोड़कर अलग होने का फैसला कर लिया था। महिला ने वजह बताई कि पति रात में चाय बनाने को कहता है। पुलिस ने दोनों पक्ष को समझा, परिवार वालों को भी शामिल किया और फिर से साथ भेजा।
ऐसे काम करती है टीम
काउंसलर प्रिया कुमारी, डॉ. विकास रंजन मणि त्रिपाठी, प्रभारी भूपेंद्र मिश्रा, डॉ. प्रियंका, सिपाही कौशल्या चौहान आदि की टीम है। टीम दोनों पक्ष को बुलाने के बाद काउंसिलिंग करती है। सामाजिक, मनोवैज्ञानिक, नैतिक दायित्वों के पहलुओं पर समझाया जाता है। इसके साथ ही कानूनी दांव-पेंच भी बताए जाते हैं। फिर दंपती के तैयार होने पर समझौता कराकर साथ भेजा जाता है। नहीं मानने पर केस दर्ज कर फिर कानूनी कार्रवाई की जाती है।
डीआईजी जे. रविंद्र गौड़ ने कहा कि कई लोग छोटी-छोटी बातों पर रिश्ता खत्म करने का फैसला कर लेते हैं। ऐसे कई प्रार्थनापत्र आते हैं। ऐसे मामलों में पुलिस की पहली कोशिश होती है कि रिश्तों को कानूनी जाल में फंसाने की जगह बातचीत के जरिये सुलझा कर फिर से बसाया जाए। परिवार परामर्श केंद्र पर ऐसे ही मामलों को सुलह समझौते के आधार पर निपटारा कराया जाता है। पुलिस को इसमें अच्छी कामयाबी मिली है।